ghazalKuch Alfaaz

हमारे दिल ने पुकारा है अब चले आओ ज़बाँ पे नाम तुम्हारा है अब चले आओ फ़ज़ा में दर्द का मंज़र है रात काली है अजीब हाल हमारा है अब चले आओ हमारे पास भला और है ही क्या सोचो बस एक ही तो सहारा है अब चले आओ तुम्हारे बा'द तुम्हारी हसीन यादों में हर एक लम्हा गुज़ारा है अब चले आओ ख़राब हाल ये कश्ती है डूब जाएगी तुम्हारा साथ किनारा है अब चले आओ

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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ज़बाँ तो खोल नज़र तो मिला जवाब तो दे मैं कितनी बार लुटा हूँ मुझे हिसाब तो दे तेरे बदन की लिखावट में है उतार चढ़ाव मैं तुझे कैसे पढूँगा मुझे किताब तो दे तेरा सवाल है साक़ी कि ज़िंदगी क्या है? जवाब देता हूँ पहले मुझे शराब तो दे

Rahat Indori

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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

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ख़ामोश लब हैं झुकी हैं पलकें, दिलों में उल्फ़त नई नई है अभी तक़ल्लुफ़ है गुफ़्तगू में, अभी मोहब्बत नई नई है अभी न आएँगी नींद तुम को, अभी न हम को सुकूँ मिलेगा अभी तो धड़केगा दिल ज़ियादा, अभी मुहब्बत नई नई है बहार का आज पहला दिन है, चलो चमन में टहल के आएँ फ़ज़ा में ख़ुशबू नई नई है गुलों में रंगत नई नई है जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है ज़रा सा क़ुदरत ने क्या नवाज़ा के आके बैठे हो पहली सफ़ में अभी क्यूँ उड़ने लगे हवा में अभी तो शोहरत नई नई है बमों की बरसात हो रही है, पुराने जांबाज़ सो रहे हैं ग़ुलाम दुनिया को कर रहा है वो जिस की ताक़त नई नई है

Shabeena Adeeb

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चला है सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हें हक़ दे दिया किस ने दियों के दिल दुखाने का इरादा छोड़िए अपनी हदों से दूर जाने का ज़माना है ज़माने की निगाहों में न आने का कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का ये मैं ही था बचा के ख़ुद को ले आया किनारे तक समुंदर ने बहुत मौक़ा' दिया था डूब जाने का

Waseem Barelvi

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इश्क़ वाली गमज़दा या दोस्ती वाली करें हम सुख़न-वर हैं बताओ शा'इरी कैसी करें बच गए तो ज़िंदगी लाचार कर देगी तुम्हें इस लिए मरने से पहले मौत को राजी करें मेरा दिल मेरी शिकायत मेरे दुख मेरी सज़ा आप को क्या ही पड़ी है आप बस जी जी करें बाद-ए-रुसवाई कोई ग़म ही नहीं रुसवाई का जी में आता है की अब रुस्वा हर इक हस्ती करें ऐ मोहब्बत तुझ सेे क्यूँ भरता नहीं आख़िर ये दिल कितना दिल को दर्द दें और कितना दिल ज़ख़्मी करें हिज्र की दीवार पर तस्वीर है इक हिज्र की सोचते हैं बारहा सीधी करें उल्टी करें वो जिंहोने ख़्वाहिशें पे ख़्वाहिशें तस्लीम की ज़िंदगी अच्छी कटेगी ख़्वाहिशें छोटी करें हम को अब हम सेे निकलने में लगेगा वक़्त कुछ छोड़ दें हम को हमारे हाल बस इतनी करें दिल दुखाकर बोलते हैं कितने दिल जूँ लोग हैं जाने वाले अब तुम्हारी फ़िक्र भी कितनी करें दर्द ही बस दर्द और इस के अलावा कुछ नहीं अब करें तो क्या करें क्या दर्द की खेती करें धीरे धीरे जल रहा है कुछ तमाम आज़ी कहीं इस सेे पहले ख़ाक हो जाएँ शिफ़ा जल्दी करें

Ajeetendra Aazi Tamaam

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