ghazalKuch Alfaaz

इश्क़ वाली गमज़दा या दोस्ती वाली करें हम सुख़न-वर हैं बताओ शा'इरी कैसी करें बच गए तो ज़िंदगी लाचार कर देगी तुम्हें इस लिए मरने से पहले मौत को राजी करें मेरा दिल मेरी शिकायत मेरे दुख मेरी सज़ा आप को क्या ही पड़ी है आप बस जी जी करें बाद-ए-रुसवाई कोई ग़म ही नहीं रुसवाई का जी में आता है की अब रुस्वा हर इक हस्ती करें ऐ मोहब्बत तुझ सेे क्यूँ भरता नहीं आख़िर ये दिल कितना दिल को दर्द दें और कितना दिल ज़ख़्मी करें हिज्र की दीवार पर तस्वीर है इक हिज्र की सोचते हैं बारहा सीधी करें उल्टी करें वो जिंहोने ख़्वाहिशें पे ख़्वाहिशें तस्लीम की ज़िंदगी अच्छी कटेगी ख़्वाहिशें छोटी करें हम को अब हम सेे निकलने में लगेगा वक़्त कुछ छोड़ दें हम को हमारे हाल बस इतनी करें दिल दुखाकर बोलते हैं कितने दिल जूँ लोग हैं जाने वाले अब तुम्हारी फ़िक्र भी कितनी करें दर्द ही बस दर्द और इस के अलावा कुछ नहीं अब करें तो क्या करें क्या दर्द की खेती करें धीरे धीरे जल रहा है कुछ तमाम आज़ी कहीं इस सेे पहले ख़ाक हो जाएँ शिफ़ा जल्दी करें

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थोड़ा लिक्खा और ज़ियादा छोड़ दिया आने वालों के लिए रस्ता छोड़ दिया तुम क्या जानो उस दरिया पर क्या गुज़री तुम ने तो बस पानी भरना छोड़ दिया लड़कियाँ इश्क़ में कितनी पागल होती हैं फ़ोन बजा और चूल्हा जलता छोड़ दिया रोज़ इक पत्ता मुझ में आ गिरता है जब से मैं ने जंगल जाना छोड़ दिया बस कानों पर हाथ रखे थे थोड़ी देर और फिर उस आवाज़ ने पीछा छोड़ दिए

Tehzeeb Hafi

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तुम्हें बस ये बताना चाहता हूँ मैं तुम से क्या छुपाना चाहता हूँ कभी मुझ से भी कोई झूठ बोलो मैं हाँ में हाँ मिलाना चाहता हूँ ये जो खिड़की है नक़्शे में तुम्हारे यहाँ मैं दर बनाना चाहता हूँ अदाकारी बहुत दुख दे रही है मैं सच-मुच मुस्कुराना चाहता हूँ परों में तीर है पंजों में तिनके मैं ये चिड़िया उड़ाना चाहता हूँ लिए बैठा हूँ घुँघरू फूल मोती तिरा हँसना बनाना चाहता हूँ अमीरी इश्क़ की तुम को मुबारक मैं बस खाना-कमाना चाहता हूँ मैं सारे शहर की बैसाखियों को तिरे दर पर नचाना चाहता हूँ मुझे तुम सेे बिछड़ना ही पड़ेगा मैं तुम को याद आना चाहता हूँ

Fahmi Badayuni

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बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं

Rehman Faris

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चल ख़्वाहिश की बात करेंगे ख़ाली डिश की बात करेंगे पहले प्यासे तो बन जाओ फिर बारिश की बात करेंगे आना टूटा रिश्ता ले कर गुंजाइश की बात करेंगे बन्दे इक दो सज्दे कर के फ़रमाइश की बात करेंगे तुम औरों के शे'र सुनाओ हम ताबिश की बात करेंगे

Zubair Ali Tabish

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चला है सिलसिला कैसा ये रातों को मनाने का तुम्हें हक़ दे दिया किस ने दियों के दिल दुखाने का इरादा छोड़िए अपनी हदों से दूर जाने का ज़माना है ज़माने की निगाहों में न आने का कहाँ की दोस्ती किन दोस्तों की बात करते हो मियाँ दुश्मन नहीं मिलता कोई अब तो ठिकाने का निगाहों में कोई भी दूसरा चेहरा नहीं आया भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का ये मैं ही था बचा के ख़ुद को ले आया किनारे तक समुंदर ने बहुत मौक़ा' दिया था डूब जाने का

Waseem Barelvi

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