हम को लुत्फ़ आता है अब फ़रेब खाने में आज़माएँ लोगों को ख़ूब आज़माने में दो-घड़ी के साथी को हम-सफ़र समझते हैं किस क़दर पुराने हैं हम नए ज़माने में तेरे पास आने में आधी उम्र गुज़री है आधी उम्र गुज़रेगी तुझ से ऊब जाने में एहतियात रखने की कोई हद भी होती है भेद हमीं ने खोले हैं भेद को छुपाने में ज़िंदगी तमाशा है और इस तमाशे में खेल हम बिगाड़ेंगे खेल को बनाने में
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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले
Anand Raj Singh
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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा
Javed Akhtar
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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो
Jaun Elia
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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे
Tehzeeb Hafi
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तुम हक़ीक़त नहीं हो हसरत हो जो मिले ख़्वाब में वो दौलत हो तुम हो ख़ुशबू के ख़्वाब की ख़ुशबू और इतने ही बेमुरव्वत हो किस तरह छोड़ दूँ तुम्हें जानाँ तुम मेरी ज़िन्दगी की आदत हो किसलिए देखते हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो दास्ताँ ख़त्म होने वाली है तुम मेरी आख़िरी मुहब्बत हो
Jaun Elia
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हमेशा दिल में रहता है कभी गोया नहीं जाता जिसे पाया नहीं जाता उसे खोया नहीं जाता कुछ ऐसे ज़ख़्म हैं जिन को सभी शादाब लगते हैं कुछ ऐसे दाग़ हैं जिन को कभी धोया नहीं जाता अजब सी गूँज उठती दर-ओ-दीवार से हर-दम ये ख़्वाबों का ख़राबा है यहाँ सोया नहीं जाता बहुत हँसने की आदत का यही अंजाम होता है कि हम रोना भी चाहें तो कभी रोया नहीं जाता
Alam Khursheed
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हाथ पकड़ ले अब भी तेरा हो सकता हूँ मैं भीड़ बहुत है इस मेले में खो सकता हूँ मैं पीछे छूटे साथी मुझ को याद आ जाते हैं वर्ना दौड़ में सब से आगे हो सकता हूँ मैं कब समझेंगे जिन की ख़ातिर फूल बिछाता हूँ राह-गुज़र में काँटे भी तो बो सकता हूँ मैं इक छोटा सा बच्चा मुझ में अब तक ज़िंदा है छोटी छोटी बात पे अब भी रो सकता हूँ मैं सन्नाटे में दहशत हर पल गूँजा करती है इस जंगल में चैन से कैसे सो सकता हूँ मैं सोच समझ कर चट्टानों से उलझा हूँ वर्ना बहती गंगा में हाथों को धो सकता हूँ मैं
Alam Khursheed
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