जब दिल ने तड़पना छोड़ दिया जलवों ने मचलना छोड़ दिया पोशाक बहारों ने बदली फूलों ने महकना छोड़ दिया पिंजरे की सम्त चले पंछी शाख़ों ने लचकना छोड़ दिया कुछ अब के हुई बरसात ऐसी खेतों ने लहकना छोड़ दिया जब से वो समुंदर पार गया गोरी ने सँवरना छोड़ दिया बाहर की कमाई ने बेकल अब गाँव में बसना छोड़ दिया
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कभी मिलेंगे तो ये कर्ज़ भी उतारेंगे तुम्हारे चेहरे को पहरों तलक निहारेंगे ये क्या सितम कि खिलाड़ी बदल दिया उस ने हम इस उमीद पे बैठे थे हम ही हारेंगे हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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एक और शख़्स छोड़ कर चला गया तो क्या हुआ हमारे साथ कौन सा ये पहली मर्तबा हुआ अज़ल से इन हथेलियों में हिज्र की लकीर थी तुम्हारा दुख तो जैसे मेरे हाथ में बड़ा हुआ मेरे ख़िलाफ़ दुश्मनों की सफ़ में है वो और मैं बहुत बुरा लगूँगा उस पर तीर खींचता हुआ
Tehzeeb Hafi
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था एक शख़्स के हाथ में था सब कुछ मेरा खिलना भी मुरझाना भी रोता था तो रात उजड़ जाती हँसता था तो दिन बन जाता था मैं रब से राब्ते में रहता मुमकिन है की उस से राब्ता हो मुझे हाथ उठाना पड़ते थे तब जा कर वो फोन उठाता था मुझे आज भी याद है बचपन में कभी उस पर नजर अगर पड़ती मेरे बस्ते से फूल बरसते थे मेरी तख्ती पे दिल बन जाता था हम एक ज़िंदान में ज़िंदा थे हम एक जंजीर में बढ़े हुए एक दूसरे को देख कर हम कभी हंसते थे तो रोना आता था वो जिस्म नज़र-अंदाज़ नहीं हो पाता था इन आँखों से मुजरिम ठहराता था अपना कहने को तो घर ठहराता था
Tehzeeb Hafi
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महीनों बा'द दफ्तर आ रहे हैं हम एक सद में से बाहर आ रहे हैं तेरी बाहों से दिल उकता गया हैं अब इस झूले में चक्कर आ रहे हैं कहाँ सोया है चौकीदार मेरा ये कैसे लोग अंदर आ रहे हैं समुंदर कर चुका तस्लीम हम को खजाने ख़ुद ही ऊपर आ रहे हैं यही एक दिन बचा था देखने को उसे बस में बिठा कर आ रहे हैं
Tehzeeb Hafi
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मेरे दिल में ये तेरे सिवा कौन है? तू नहीं है तो तेरी जगह कौन है? हम मोहब्बत में हारे हुए लोग हैं और मोहब्बत में जीता हुआ कौन है? मेरे पहलू से उठ के गया कौन है? तू नहीं है तो तेरी जगह कौन है? तू ने जाते हुए ये बताया नहीं मैं तेरा कौन हूँ तू मेरा कौन है
Tehzeeb Hafi
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