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magar vo diid ko aaya tha baaghh men gul ke ki bu kuchh aur main paai dimaghh men gul ke adu bhi ho sabab-e-zindagi jo haq chahe nasim-e-subh hai roghhan charaghh men gul ke chaman khilen hain pahunch baada le ke ai saaqi girafta-dil mujhe mat kar faraghh men gul ke nahin hai ja-e-tarannum ye bostan ki nahin sivae khun-e-jigar mai ayaghh men gul ke ali ka naqsh-e-qadam dhundhta hai yuun 'sauda' phire hai bad-e-sahar juun suraghh men gul ke magar wo did ko aaya tha bagh mein gul ke ki bu kuchh aur main pai dimagh mein gul ke adu bhi ho sabab-e-zindagi jo haq chahe nasim-e-subh hai roghan charagh mein gul ke chaman khilen hain pahunch baada le ke ai saqi girafta-dil mujhe mat kar faragh mein gul ke nahin hai ja-e-tarannum ye bostan ki nahin siwae khun-e-jigar mai ayagh mein gul ke ali ka naqsh-e-qadam dhundhta hai yun 'sauda' phire hai baad-e-sahar jun suragh mein gul ke

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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क्यूँँ डरें ज़िन्दगी में क्या होगा कुछ न होगा तो तजरबा होगा हँसती आँखों में झाँक कर देखो कोई आँसू कहीं छुपा होगा इन दिनों ना-उमीद सा हूँ मैं शायद उस ने भी ये सुना होगा देख कर तुम को सोचता हूँ मैं क्या किसी ने तुम्हें छुआ होगा

Javed Akhtar

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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो

Jaun Elia

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जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे दो दिन में हम तो रीझे ऐ वाए हाल उन का गुज़रे हैं जिन के दिल को याँ माह-ओ-साल बाँधे तार-ए-निगह में उस के क्यूँँकर फँसे न ये दिल आँखों ने जिस के लाखों वहशी ग़ज़ाल बाँधे जो कुछ है रंग उस का सो है नज़र में अपनी गो जामा ज़र्द पहने या चीरा लाल बाँधे तेरे ही सामने कुछ बहके है मेरा नाला वर्ना निशाने हम ने मारे हैं बाल बाँधे बोसे की तो है ख़्वाहिश पर कहिए क्यूँँकि उस से जिस का मिज़ाज लब पर हर्फ़-ए-सवाल बाँधे मारोगे किस को जी से किस पर कमर कसी है फिरते हो क्यूँँ प्यारे तलवार ढाल बाँधे दो-चार शे'र आगे उस के पढ़े तो बोला मज़मूँ ये तू ने अपने क्या हस्ब-ए-हाल बाँधे 'सौदा' जो उन ने बाँधा ज़ुल्फ़ों में दिल सज़ा है शे'रों में उस के तू ने क्यूँँ ख़त्त-ओ-ख़ाल बाँधे

Mohammad Rafi Sauda

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