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milna tha ittifaq bichhadna nasib tha vo utni duur ho gaya jitna qarib tha main us ko dekhne ko tarasti hi rah gai jis shakhs ki hatheli pe mera nasib tha basti ke saare log hi atish-parast the ghar jal raha tha aur samundar qarib tha mariyam kahan talash kare apne khuun ko har shakhs ke gale men nishan-e-salib tha dafna diya gaya mujhe chandi ki qabr men main jis ko chahti thi vo ladka ghharib tha milna tha ittifaq bichhadna nasib tha wo utni dur ho gaya jitna qarib tha main us ko dekhne ko tarasti hi rah gai jis shakhs ki hatheli pe mera nasib tha basti ke sare log hi aatish-parast the ghar jal raha tha aur samundar qarib tha mariyam kahan talash kare apne khun ko har shakhs ke gale mein nishan-e-salib tha dafna diya gaya mujhe chandi ki qabr mein main jis ko chahti thi wo ladka gharib tha

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वो बे-वफ़ा है तो क्या मत कहो बुरा उस को कि जो हुआ सो हुआ ख़ुश रखे ख़ुदा उस को नज़र न आए तो उस की तलाश में रहना कहीं मिले तो पलट कर न देखना उस को वो सादा-ख़ू था ज़माने के ख़म समझता क्या हवा के साथ चला ले उड़ी हवा उस को वो अपने बारे में कितना है ख़ुश-गुमाँ देखो जब उस को मैं भी न देखूँ तो देखना उस को अभी से जाना भी क्या उस की कम-ख़याली पर अभी तो और बहुत होगा सोचना उस को उसे ये धुन कि मुझे कम से कम उदास रखे मिरी दु'आ कि ख़ुदा दे ये हौसला उस को पनाह ढूँढ़ रही है शब-ए-गिरफ़्ता-दिलाँ कोई बताओ मिरे घर का रास्ता उस को ग़ज़ल में तज़्किरा उस का न कर 'नसीर' कि अब भुला चुका वो तुझे तू भी भूल जा उस को

Naseer Turabi

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कैसे उस ने ये सब कुछ मुझ सेे छुप कर बदला चेहरा बदला रस्ता बदला बा'द में घर बदला मैं उस के बारे में ये कहता था लोगों से मेरा नाम बदल देना वो शख़्स अगर बदला वो भी ख़ुश था उस ने दिल देकर दिल माँगा है मैं भी ख़ुश हूँ मैं ने पत्थर से पत्थर बदला मैं ने कहा क्या मेरी ख़ातिर ख़ुद को बदलोगे और फिर उस ने नज़रें बदलीं और नंबर बदला

Tehzeeb Hafi

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उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

Waseem Barelvi

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तेरा चुप रहना मेरे ज़ेहन में क्या बैठ गया इतनी आवाज़ें तुझे दीं कि गला बैठ गया यूँँ नहीं है कि फ़क़त मैं ही उसे चाहता हूँ जो भी उस पेड़ की छाँव में गया बैठ गया इतना मीठा था वो ग़ुस्से भरा लहजा मत पूछ उस ने जिस को भी जाने का कहा, बैठ गया अपना लड़ना भी मोहब्बत है तुम्हें इल्म नहीं चीख़ती तुम रही और मेरा गला बैठ गया उस की मर्ज़ी वो जिसे पास बिठा ले अपने इस पे क्या लड़ना फुलाँ मेरी जगह बैठ गया बात दरियाओं की, सूरज की, न तेरी है यहाँ दो क़दम जो भी मेरे साथ चला बैठ गया बज़्म-ए-जानाँ में नशिस्तें नहीं होतीं मख़्सूस जो भी इक बार जहाँ बैठ गया बैठ गया

Tehzeeb Hafi

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याद तब करते हो करने को न हो जब कुछ भी और कहते हो तुम्हें इश्क़ है मतलब कुछ भी अब जो आ आ के बताते हो वो शख़्स ऐसा था जब मेरे साथ था वो क्यूँँ न कहा तब कुछ भी वक्फ़े-वक्फ़े से मुझे देखने आते रहना हिज्र की शब है सो हो सकता है इस शब कुछ भी

Umair Najmi

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तुम को भुला रही थी कि तुम याद आ गए मैं ज़हर खा रही थी कि तुम याद आ गए कल मेरी एक प्यारी सहेली किताब में इक ख़त छुपा रही थी कि तुम याद आ गए उस वक़्त रात-रानी मिरे सूने सहन में ख़ुशबू लुटा रही थी कि तुम याद आ गए ईमान जानिए कि इसे कुफ़्र जानिए मैं सर झुका रही थी कि तुम याद आ गए कल शाम छत पे मीर-तक़ी-'मीर'' की ग़ज़ल मैं गुनगुना रही थी कि तुम याद आ गए 'अंजुम' तुम्हारा शहर जिधर है उसी तरफ़ इक रेल जा रही थी कि तुम याद आ गए

Anjum Rehbar

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मिलना था इत्तिफ़ाक़ बिछड़ना नसीब था वो उतनी दूर हो गया जितना क़रीब था मैं उस को देखने को तरसती ही रह गई जिस शख़्स की हथेली पे मेरा नसीब था बस्ती के सारे लोग ही आतिश-परस्त थे घर जल रहा था और समुंदर क़रीब था मरियम कहाँ तलाश करे अपने ख़ून को हर शख़्स के गले में निशान-ए-सलीब था दफ़ना दिया गया मुझे चाँदी की क़ब्र में मैं जिस को चाहती थी वो लड़का ग़रीब था

Anjum Rehbar

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जिन के आँगन में अमीरी का शजर लगता है  उन का हर ऐब ज़माने को हुनर लगता है  चाँद तारे मिरे क़दमों में बिछे जाते हैं  ये बुज़ुर्गों की दु'आओं का असर लगता है  माँ मुझे देख के नाराज़ न हो जाए कहीं  सर पे आँचल नहीं होता है तो डर लगता है

Anjum Rehbar

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