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rakhta hai go qadim se buniyad agara akbar ke naam se hua abad agara yaan ke khandar na aur jagah ki imaraten yaaro ajab maqam hai dil-shad agara shaddad zar laga na banata bahisht ko gar janta ki hovega abad agara tode koi qile ko koi luute shahr ko ab kis se apni mange bhala daad agara ab to zara sa gaanv hai beti na de ise lagta tha varna chiin ka damad agara yak-bargi to ab mujhe ya-rab tu phir basa karta hai ab khuda se ye fariyad agara ik khub-ru nahin hai yahan varna ek din tha rashk-e-husn-e-balakh-va-naushad agara hargiz vatan ki yaad na aave use kabhi jo kar ke apni jaan ko kare shaad agara is men sada khushi se raha hai tira 'nazir' ya-rab hamesha rakhiyo to abad agara rakhta hai go qadim se buniyaad aagara akbar ke nam se hua aabaad aagara yan ke khandar na aur jagah ki imaraten yaro ajab maqam hai dil-shad aagara shaddad zar laga na banata bahisht ko gar jaanta ki howega aabaad aagara tode koi qile ko koi lute shahr ko ab kis se apni mange bhala dad aagara ab to zara sa ganw hai beti na de ise lagta tha warna chin ka damad aagara yak-bargi to ab mujhe ya-rab tu phir basa karta hai ab khuda se ye fariyaad aagara ek khub-ru nahin hai yahan warna ek din tha rashk-e-husn-e-balakh-wa-naushad aagara hargiz watan ki yaad na aawe use kabhi jo kar ke apni jaan ko kare shad aagara is mein sada khushi se raha hai tera 'nazir' ya-rab hamesha rakhiyo to aabaad aagara

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यही अपनी कहानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वो लड़की जाँ हमारी थी, मियाँ पहले बहुत पहले वहम मुझ को ये भाता है,अभी मेरी दिवानी है मगर मेरी दिवानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले रक़ीब आ कर बताते हैं यहाँ तिल है, वहाँ तिल है हमें ये जानकारी थी मियाँ पहले, बहुत पहले अदब से माँग कर माफ़ी भरी महफ़िल ये कहता हूँ वो लड़की ख़ानदानी थी, मियाँ पहले बहुत पहले

Anand Raj Singh

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उसी जगह पर जहाँ कई रास्ते मिलेंगे पलट के आए तो सब सेे पहले तुझे मिलेंगे अगर कभी तेरे नाम पर जंग हो गई तो हम ऐसे बुज़दिल भी पहली सफ़ में खड़े मिलेंगे तुझे ये सड़कें मेरे तवस्सुत से जानती हैं तुझे हमेशा ये सब इशारे खुले मिलेंगे

Tehzeeb Hafi

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चाँद सितारे फूल परिंदे शाम सवेरा एक तरफ़ सारी दुनिया उस का चर्बा उस का चेहरा एक‌ तरफ़ वो लड़कर भी सो जाए तो उस का माथा चूमूँ मैं उस सेे मुहब्बत एक तरफ़ है उस सेे झगड़ा एक तरफ़ जिस शय पर वो उँगली रख दे उस को वो दिलवानी है उस की ख़ुशियाँ सब से अव्वल सस्ता महँगा एक तरफ़ ज़ख़्मों पर मरहम लगवाओ लेकिन उस के हाथों से चारासाज़ी एक तरफ़ है उस का छूना एक तरफ़ सारी दुनिया जो भी बोले सब कुछ शोर शराबा है सब का कहना एक तरफ़ है उस का कहना एक तरफ़ उस ने सारी दुनिया माँगी मैं ने उस को माँगा है उस के सपने एक तरफ़ है मेरा सपना एक तरफ़

Varun Anand

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ये ग़म क्या दिल की आदत है नहीं तो किसी से कुछ शिकायत है नहीं तो है वो इक ख़्वाब-ए-बे-ताबीर उस को भुला देने की निय्यत है नहीं तो किसी के बिन किसी की याद के बिन जिए जाने की हिम्मत है नहीं तो किसी सूरत भी दिल लगता नहीं हाँ तो कुछ दिन से ये हालत है नहीं तो तेरे इस हाल पर है सब को हैरत तुझे भी इस पे हैरत है नहीं तो हम-आहंगी नहीं दुनिया से तेरी तुझे इस पर नदामत है नहीं तो हुआ जो कुछ यही मक़्सूम था क्या यही सारी हिकायत है नहीं तो अज़िय्यत-नाक उम्मीदों से तुझ को अमाँ पाने की हसरत है नहीं तो तू रहता है ख़याल-ओ-ख़्वाब में गुम तो इस की वज्ह फ़ुर्सत है नहीं तो सबब जो इस जुदाई का बना है वो मुझ सेे ख़ूब-सूरत है नहीं तो

Jaun Elia

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मेरे बस में नहीं वरना क़ुदरत का लिखा हुआ काटता तेरे हिस्से में आए बुरे दिन कोई दूसरा काटता लारियों से ज़्यादा बहाव था तेरे हर इक लफ्ज़ में मैं इशारा नहीं काट सकता तेरी बात क्या काटता मैं ने भी ज़िंदगी और शब ए हिज्र काटी है सबकी तरह वैसे बेहतर तो ये था के मैं कम से कम कुछ नया काटता तेरे होते हुए मोमबत्ती बुझाई किसी और ने क्या ख़ुशी रह गई थी जन्मदिन की, मैं केक क्या काटता कोई भी तो नहीं जो मेरे भूखे रहने पे नाराज़ हो जेल में तेरी तस्वीर होती तो हँसकर सज़ा काटता

Tehzeeb Hafi

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हर आन तुम्हारे छुपने से ऐसा ही अगर दुख पाएँगे हम तो हार के इक दिन इस की भी तदबीर कोई ठहराएँगे हम बेज़ार करेंगे ख़ातिर को पहले तो तुम्हारी चाहत से फिर दिल को भी कुछ मिन्नत से कुछ हैबत से समझाएँगे हम गर कहना दिल ने मान लिया और रुक बैठा तो बहत्तर है और चैन न लेने देवेगा तो भेस बदल कर आएँगे हम अव्वल तो नहीं पहचानोगे और लोगे भी पहचान तो फिर हर तौर से छुप कर देखेंगे और दिल को ख़ुश कर जाएँगे हम गर छुपना भी खुल जावेगा तो मिल कर अफ़्सूँ-साज़ों से कुछ और ही लटका सेहर-भरा उस वक़्त बहम पहुँचाएँगे हम जब वो भी पेश न जावेगा और शोहरत होवेगी फिर तो जिस सूरत से बन आवेगा तस्वीर खिंचा मंगवाएँगे हम मौक़ूफ़ करोगे छुपने को तो बेहतर वर्ना 'नज़ीर' आसा जो हर्फ़ ज़बाँ पर लाएँगे फिर वो ही कर दिखलाएँगे हम

Nazeer Akbarabadi

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