सर उठाने की तो हिम्मत नहीं करने वाले ये जो मुर्दा हैं बग़ावत नहीं करने वाले मुफ़्लिसी लाख सही हम में वो ख़ुद्दारी है हाकिम-ए-वक़्त की ख़िदमत नहीं करने वाले इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले हाथ आँधी से मिला आए इसी दौर के लोग ये चराग़ों की हिफ़ाज़त नहीं करने वाले इश्क़ हम को ये निभाना है तो जो रख शर्तें हम किसी शर्त पे हुज्जत नहीं करने वाले फोड़ कर सर तिरे दर पर यहीं मर जाएँगे हम तिरे शहर से हिजरत नहीं करने वाले
Related Ghazal
आँख को आइना समझते हो तुम भी सबकी तरह समझते हो दोस्त अब क्यूँ नहीं समझते तुम तुम तो कहते थे ना समझते हो अपना ग़म तुम को कैसे समझाऊँ सब सेे हारा हुआ समझते हो मेरी दुनिया उजड़ गई इस में तुम इसे हादसा समझते हो आख़िरी रास्ता तो बाक़ी है आख़िरी रास्ता समझते हो
Himanshi babra KATIB
76 likes
तमाशा-ए-दैर-ओ-हरम देखते हैं तुझे हर बहाने से हम देखते हैं हमारी तरफ़ अब वो कम देखते हैं वो नज़रें नहीं जिन को हम देखते हैं ज़माने के क्या क्या सितम देखते हैं हमीं जानते हैं जो हम देखते हैं
Dagh Dehlvi
84 likes
ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे बना चुका हूँ मैं मोहब्बतों के दर्द की दवा अगर किसी को चाहिए तो मुझ सेे राब्ता करे
Tehzeeb Hafi
292 likes
बैठे हैं चैन से कहीं जाना तो है नहीं हम बे-घरों का कोई ठिकाना तो है नहीं तुम भी हो बीते वक़्त के मानिंद हू-ब-हू तुम ने भी याद आना है आना तो है नहीं अहद-ए-वफ़ा से किस लिए ख़ाइफ़ हो मेरी जान कर लो कि तुम ने अहद निभाना तो है नहीं वो जो हमें अज़ीज़ है कैसा है कौन है क्यूँँ पूछते हो हम ने बताना तो है नहीं दुनिया हम अहल-ए-इश्क़ पे क्यूँँ फेंकती है जाल हम ने तिरे फ़रेब में आना तो है नहीं वो इश्क़ तो करेगा मगर देख भाल के 'फ़ारिस' वो तेरे जैसा दिवाना तो है नहीं
Rehman Faris
196 likes
उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है
Waseem Barelvi
107 likes
More from Nadim Nadeem
दुनिया की नज़रों में हम तो जोकर हैं सब को ख़ुश रक्खें मतलब वो जोकर हैं अपना अपना दर्द छुपाते हैं दोनों इक वो है इक मैं हूँ हम दो जोकर हैं आईना रोया है उन की बातों पर बैठे ख़ुद के सामने जब दो जोकर हैं बात हमारी सुन कर पहले रोए सब लेकिन फिर ये बोले छोड़ो, जोकर हैं चालू है सर्कस चाहें कुछ भी कह दें उन की बात पे मत जाओ वो जोकर हैं नाम छुपाकर दर्द ख़रीदो दुनिया के कोई गर पूछे तो कह दो जोकर हैं अपने ग़म को भूल के हम पर हँसते हो ग़म का है एहसास हमें सो जोकर हैं ख़त्म कहानी कर के जब तुम ही ख़ुश हो अपना क्या है यार अपन तो जोकर हैं
Nadim Nadeem
1 likes
सर उठाने की तो हिम्मत नहीं करने वाले ये जो मुर्दा हैं बग़ावत नहीं करने वाले मुफ़्लिसी लाख सही हम में वो ख़ुद्दारी है हाकिम-ए-वक़्त की ख़िदमत नहीं करने वाले इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले हाथ आँधी से मिला आए इसी दौर के लोग ये चराग़ों की हिफ़ाज़त नहीं करने वाले इश्क़ हम को ये निभाना है तो जो रख शर्तें हम किसी शर्त पे हुज्जत नहीं करने वाले फोड़ कर सर तिरे दर पर यहीं मर जाएँगे हम तिरे शहर से हिजरत नहीं करने वाले
Nadim Nadeem
0 likes
तुम्हारे जाने का हम को मलाल थोड़ी है उदासियों में तुम्हारा ख़याल थोड़ी है मनाऊँ किस तरह होली मैं दोस्तों के साथ हैं सब के हाथ में ख़ंजर गुलाल थोड़ी है मुझे ये ग़म है वो अब साथ है रक़ीबों के ये आँख उस के बिछड़ने से लाल थोड़ी है सवाल ये है हवा आई किस इशारे पर चराग़ किस के बुझे ये सवाल थोड़ी है करम है उस का अगर वो नवाज़ता है हमें हमारे सज्दों का इस में कमाल थोड़ी है
Nadim Nadeem
4 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Nadim Nadeem.
Similar Moods
More moods that pair well with Nadim Nadeem's ghazal.







