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सर उठाने की तो हिम्मत नहीं करने वाले ये जो मुर्दा हैं बग़ावत नहीं करने वाले मुफ़्लिसी लाख सही हम में वो ख़ुद्दारी है हाकिम-ए-वक़्त की ख़िदमत नहीं करने वाले इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले हाथ आँधी से मिला आए इसी दौर के लोग ये चराग़ों की हिफ़ाज़त नहीं करने वाले इश्क़ हम को ये निभाना है तो जो रख शर्तें हम किसी शर्त पे हुज्जत नहीं करने वाले फोड़ कर सर तिरे दर पर यहीं मर जाएँगे हम तिरे शहर से हिजरत नहीं करने वाले

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ये मैं ने कब कहा कि मेरे हक़ में फ़ैसला करे अगर वो मुझ से ख़ुश नहीं है तो मुझे जुदा करे मैं उस के साथ जिस तरह गुज़ारता हूँ ज़िंदगी उसे तो चाहिए कि मेरा शुक्रिया अदा करे मेरी दुआ है और इक तरह से बद-दुआ भी है ख़ुदा तुम्हें तुम्हारे जैसी बेटियाँ अता करे बना चुका हूँ मैं मोहब्बतों के दर्द की दवा अगर किसी को चाहिए तो मुझ सेे राब्ता करे

Tehzeeb Hafi

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उसूलों पर जहाँ आँच आए टकराना ज़रूरी है जो ज़िंदा हो तो फिर ज़िंदा नज़र आना ज़रूरी है नई 'उम्रों की ख़ुदमुख़्तारियों को कौन समझाये कहाँ से बच के चलना है कहाँ जाना ज़रूरी है थके हारे परिंदे जब बसेरे के लिए लौटें सलीक़ामन्द शाख़ों का लचक जाना ज़रूरी है बहुत बेबाक आँखों में तअल्लुक़ टिक नहीं पाता मुहब्बत में कशिश रखने को शर्माना ज़रूरी है सलीक़ा ही नहीं शायद उसे महसूस करने का जो कहता है ख़ुदा है तो नज़र आना ज़रूरी है मेरे होंठों पे अपनी प्यास रख दो और फिर सोचो कि इस के बा'द भी दुनिया में कुछ पाना ज़रूरी है

Waseem Barelvi

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मैं ने जो कुछ भी सोचा हुआ है, मैं वो वक़्त आने पे कर जाऊँगा तुम मुझे ज़हर लगते हो और मैं किसी दिन तुम्हें पी के मर जाऊँगा तू तो बीनाई है मेरी तेरे अलावा मुझे कुछ भी दिखता नहीं मैं ने तुझ को अगर तेरे घर पे उतारा तो मैं कैसे घर जाऊँगा चाहता हूँ तुम्हें और बहुत चाहता हूँ, तुम्हें ख़ुद भी मालूम है हाँ अगर मुझ सेे पूछा किसी ने तो मैं सीधा मुँह पर मुकर जाऊँगा तेरे दिल से तेरे शहर से तेरे घर से तेरी आँख से तेरे दर से तेरी गलियों से तेरे वतन से निकाला हुआ हूँ किधर जाऊँगा

Tehzeeb Hafi

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याद तब करते हो करने को न हो जब कुछ भी और कहते हो तुम्हें इश्क़ है मतलब कुछ भी अब जो आ आ के बताते हो वो शख़्स ऐसा था जब मेरे साथ था वो क्यूँँ न कहा तब कुछ भी वक्फ़े-वक्फ़े से मुझे देखने आते रहना हिज्र की शब है सो हो सकता है इस शब कुछ भी

Umair Najmi

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चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ सारे मर्द एक जैसे हैं तुम ने कैसे कह डाला मैं भी तो एक मर्द हूँ तुम को ख़ुद से बेहतर मानता हूँ मैं ने उस सेे प्यार किया है मिल्कियत का दावा नहीं वो जिस के भी साथ है मैं उस को भी अपना मानता हूँ चादर की इज़्ज़त करता हूँ और पर्दे को मानता हूँ हर पर्दा पर्दा नहीं होता इतना मैं भी जानता हूँ

Ali Zaryoun

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सर उठाने की तो हिम्मत नहीं करने वाले ये जो मुर्दा हैं बग़ावत नहीं करने वाले मुफ़्लिसी लाख सही हम में वो ख़ुद्दारी है हाकिम-ए-वक़्त की ख़िदमत नहीं करने वाले इन से उम्मीद न रख हैं ये सियासत वाले ये किसी से भी मोहब्बत नहीं करने वाले हाथ आँधी से मिला आए इसी दौर के लोग ये चराग़ों की हिफ़ाज़त नहीं करने वाले इश्क़ हम को ये निभाना है तो जो रख शर्तें हम किसी शर्त पे हुज्जत नहीं करने वाले फोड़ कर सर तिरे दर पर यहीं मर जाएँगे हम तिरे शहर से हिजरत नहीं करने वाले

Nadim Nadeem

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दुनिया की नज़रों में हम तो जोकर हैं सब को ख़ुश रक्खें मतलब वो जोकर हैं अपना अपना दर्द छुपाते हैं दोनों इक वो है इक मैं हूँ हम दो जोकर हैं आईना रोया है उन की बातों पर बैठे ख़ुद के सामने जब दो जोकर हैं बात हमारी सुन कर पहले रोए सब लेकिन फिर ये बोले छोड़ो, जोकर हैं चालू है सर्कस चाहें कुछ भी कह दें उन की बात पे मत जाओ वो जोकर हैं नाम छुपाकर दर्द ख़रीदो दुनिया के कोई गर पूछे तो कह दो जोकर हैं अपने ग़म को भूल के हम पर हँसते हो ग़म का है एहसास हमें सो जोकर हैं ख़त्म कहानी कर के जब तुम ही ख़ुश हो अपना क्या है यार अपन तो जोकर हैं

Nadim Nadeem

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तुम्हारे जाने का हम को मलाल थोड़ी है उदासियों में तुम्हारा ख़याल थोड़ी है मनाऊँ किस तरह होली मैं दोस्तों के साथ हैं सब के हाथ में ख़ंजर गुलाल थोड़ी है मुझे ये ग़म है वो अब साथ है रक़ीबों के ये आँख उस के बिछड़ने से लाल थोड़ी है सवाल ये है हवा आई किस इशारे पर चराग़ किस के बुझे ये सवाल थोड़ी है करम है उस का अगर वो नवाज़ता है हमें हमारे सज्दों का इस में कमाल थोड़ी है

Nadim Nadeem

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