आज़ फिर हम को वही चेहरा दिखा हाँ हम जिसे अब तक भुलाने में लगे थे
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हम को दिल से भी निकाला गया फिर शहर से भी हम को पत्थर से भी मारा गया फिर ज़हरस भी
Azm Shakri
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किसी गली में किराए पे घर लिया उस ने फिर उस गली में घरों के किराए बढ़ने लगे
Umair Najmi
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इलाज अपना कराते फिर रहे हो जाने किस किस से मोहब्बत कर के देखो ना मोहब्बत क्यूँँ नहीं करते
Farhat Ehsaas
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ये शहर-ए-अजनबी में अब किसे जा कर बताएँ हम कहाँ के रहने वाले हैं कहाँ की याद आती है
Ashu Mishra
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ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
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ये सादगी ये हुस्न ये लहजा तेरा कैसे मेरा दिल तेरा दीवाना न हो
ABhishek Parashar
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ये कहानी भी मुकम्मल हो न पाई दोस्तो इस कहानी में भी उस का दिल कोई और ले गया
ABhishek Parashar
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ये जगह उतनी भी नहीं बदली जितनी जानाँ बदल गई हो तुम
ABhishek Parashar
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ज़िंदगी से चली गई लेकिन वो मेरे ज़ेहन से नहीं जाती
ABhishek Parashar
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सस्ती शराब और महँगी औरत बर्बाद ही करे है आदमी को
ABhishek Parashar
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