आँख खुल जाए तो भुला देना नींद कैसी थी ख़्वाब किस का था
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मैं ने चाहा था ज़ख़्म भर जाएँ ज़ख़्म ही ज़ख़्म भर गए मुझ में
Ammar Iqbal
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उस को भुला कर मुझ को ये मालूम हुआ आदत कैसी भी हो छोड़ी जा सकती है
Nadeem Shaad
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न जाने क्यूँँ गले से लगने की हिम्मत नहीं होती न जाने क्यूँँ पिता के सामने बेटे नहीं खुलते
Kushal Dauneria
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आज देखा है तुझ को देर के बा'द आज का दिन गुज़र न जाए कहीं
Nasir Kazmi
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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आख़िरश जब सफ़ाई माँगी तो साफ़ इनकार ही मिला हम को
Chetan
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याद आए तो भूल जाना तुम दूर कितने हैं दरमियाँ क्या है
Chetan
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वो जो रहते हैं सब सेे घुल मिल कर दोस्ती वो निभाएँ मुश्किल है
Chetan
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यूँँ चमकता हूँ मैं खंडर तुझ सेे तू मुझे मेरा चाँद लगता है
Chetan
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मैं सोचता था इतना जितना बुरा हुआ है लगता है कम मगर ये कितना बुरा हुआ है
Chetan
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