आँखें खुलीं तो जाग उठीं हसरतें तमाम उस को भी खो दिया जिसे पाया था ख़्वाब में
sherKuch Alfaaz
Siraj Lakhnavi14 Likes
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आख़िर को हँस पड़ेंगे किसी एक बात पर रोना तमाम उम्र का बे-कार जाएगा
Khursheed Rizvi
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इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
Vikram Gaur Vairagi
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मैं सुन रहा हूँ फ़ोन पे ख़ामोशियाँ तेरी मैं जानता हूँ आज से क्या क्या तमाम है
Aslam Rashid
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आप तो मुँह फेर कर कहते हैं आने के लिए वस्ल का वा'दा ज़रा आँखें मिला कर कीजिए
Lala Madhav Ram Jauhar
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तू ने देखी है वो पेशानी वो रुख़्सार वो होंठ ज़िंदगी जिन के तसव्वुर में लुटा दी हम ने तुझ पे उठी हैं वो खोई हुई साहिर आँखें तुझ को मालूम है क्यूँ उम्र गँवा दी हम ने
Faiz Ahmad Faiz
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