इक कली की पलकों पर सर्द धूप ठहरी थी इश्क़ का महीना था हुस्न की दुपहरी थी ख़्वाब याद आते हैं और फिर डराते हैं जागना बताता है नींद कितनी गहरी थी
Related Sher
अगर है इश्क़ सच्चा तो निगाहों से बयाँ होगा ज़बाँ से बोलना भी क्या कोई इज़हार होता है
Bhaskar Shukla
130 likes
मसअला ये नहीं कि इश्क़ हुआ है हम को मसअला ये है कि इज़हार किया जाना है
Rajesh Reddy
127 likes
हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
Jaun Elia
129 likes
ख़ुद से भी मिल न सको, इतने पास मत होना इश्क़ तो करना, मगर देवदास मत होना देखना, चाहना, फिर माँगना, या खो देना ये सारे खेल हैं, इन में उदास मत होना
Kumar Vishwas
117 likes
धूप में निकलो घटाओं में नहा कर देखो ज़िंदगी क्या है किताबों को हटा कर देखो
Nida Fazli
136 likes
More from Vikram Gaur Vairagi
कूज़ा-गर मिल गया तो पूछूँगा मेरी मिट्टी कहाँ से लाया था
Vikram Gaur Vairagi
34 likes
टूटी चीज़ों को बदल दें था बेहतर वरना तू जो चाहता तो दोबारा बना लेता हमें इस तरह रोते हैं याद करते हुए हम तुझे जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें
Vikram Gaur Vairagi
39 likes
इक अव्वल दर्जे का पाक इक माहिर है मन तो तुझ में रमता है दिल काफ़िर फिर है अपनी सोचो क़त्ल तुम्हें करना भी है बन्दे का तो क्या है बन्दा हाज़िर है
Vikram Gaur Vairagi
33 likes
मिरे सीने पे सर रक्खा है तो ख़ामोश मत रह मुझे बतला तुझे जो भी सुनाई दे रहा है
Vikram Gaur Vairagi
45 likes
यूँँ बे-तरतीब ज़ख़्मों ने बताया राज़ क़ातिल का सलीक़े से जो मेरा क़त्ल गर होता तो क्या होता
Vikram Gaur Vairagi
42 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Vikram Gaur Vairagi.
Similar Moods
More moods that pair well with Vikram Gaur Vairagi's sher.







