हुस्न बला का क़ातिल हो पर आख़िर को बेचारा है इश्क़ तो वो क़ातिल जिस ने अपनों को भी मारा है ये धोखे देता आया है दिल को भी दुनिया को भी इस के छल ने खार किया है सहरा में लैला को भी
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ार इश्क़ करो लेकिन इतना ध्यान रहे कि तुम को पहली मोहब्बत की बद-दुआ न लगे
Abbas Tabish
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ये फ़िल्मों में ही सब को प्यार मिल जाता है आख़िर में मगर सचमुच में इस दुनिया में ऐसा कुछ नहीं होता चलो माना कि मेरा दिल मेरे महबूब का घर है पर उस के पीछे उस के घर में क्या-क्या कुछ नहीं होता
Tehzeeb Hafi
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यूँँ तो रुस्वाई ज़हर है लेकिन इश्क़ में जान इसी से पड़ती है
Fahmi Badayuni
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साल के आख़िरी दिन उस ने दिया वक़्त हमें अब तो ये साल कई साल नहीं गुज़रेगा
Shariq Kaifi
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रह-गुज़र-ए-ख़याल में दोश-ब-दोश थे जो लोग वक़्त की गर्द-बाद में जाने कहाँ बिखर गए
Jaun Elia
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अब जो रिश्तों में बँधा हूँ तो खुला है मुझ पर कब परिंद उड़ नहीं पाते हैं परों के होते
Jaun Elia
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'जौन' दुनिया की चाकरी कर के तू ने दिल की वो नौकरी क्या की
Jaun Elia
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जाते जाते आप इतना काम तो कीजे मिरा याद का सारा सर-ओ-सामाँ जलाते जाइए
Jaun Elia
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अपने अंदर हँसता हूँ मैं और बहुत शरमाता हूँ ख़ून भी थूका सच-मुच थूका और ये सब चालाकी थी
Jaun Elia
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