आँसुओं की झड़ी ख़त में गिरती गई लिखते थे दर्द हम बहर घिरती गई
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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ये बताओ इश्क़ का ये फ़लसफ़ा क्या है दूरियाँ जब मिट गई तो अब बचा क्या है
arjun chamoli
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मिरे ख़िलाफ़ ही सब दस्तख़त हुए आख़िर मैं चुप रहा तो गुनहगार मुझ को माना है
arjun chamoli
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मेरे बयान का मतलब बदल दिया उस ने सवाल करता था जो मेरा रहनुमा बनकर
arjun chamoli
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नक़ली आँसू झूठी क़स्में सब पर्दे हैं नज़ाकत के बस बाज़ार लगे हैं जज़्बों के सौदे हैं शराफ़त के ख़ुद-ग़रज़ी के हैं अल्फ़ाज़ मोहब्बत के अफ़साने में फिर भी लाते हैं चेहरे पर झूठे रंग इनायत के
arjun chamoli
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अपने आँचल को वो बड़ी अदास बचाते हैं मेरा हाथ ज़रा छू जाए नज़रें चुराते हैं
arjun chamoli
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