अब तो ख़ुद अपनी ज़रूरत भी नहीं है हम को वो भी दिन थे कि कभी तेरी ज़रूरत हम थे
Related Sher
शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
435 likes
ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
471 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
545 likes
कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
163 likes
More from Aitbar Sajid
मेरे साथ चलने की शर्त पर कई लोग चल तो पड़े मगर कोई रास्ते में बदल गया कोई रास्ता ही बदल गया
Aitbar Sajid
0 likes
इतना कम-ज़र्फ़ न बन उस के भी सीने में है दिल उस का एहसास भी रख अपनी ही राहत पे न जा
Aitbar Sajid
0 likes
गुफ़्तुगू देर से जारी है नतीजे के बग़ैर इक नई बात निकल आती है हर बात के साथ
Aitbar Sajid
43 likes
किसी को साल-ए-नौ की क्या मुबारकबाद दी जाए कैलन्डर के बदलने से मुक़द्दर कब बदलता है
Aitbar Sajid
19 likes
डाइरी में सारे अच्छे शे'र चुन कर लिख लिए एक लड़की ने मिरा दीवान ख़ाली कर दिया
Aitbar Sajid
44 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Aitbar Sajid.
Similar Moods
More moods that pair well with Aitbar Sajid's sher.







