गुफ़्तुगू देर से जारी है नतीजे के बग़ैर इक नई बात निकल आती है हर बात के साथ
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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मेरे साथ चलने की शर्त पर कई लोग चल तो पड़े मगर कोई रास्ते में बदल गया कोई रास्ता ही बदल गया
Aitbar Sajid
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किसी को साल-ए-नौ की क्या मुबारकबाद दी जाए कैलन्डर के बदलने से मुक़द्दर कब बदलता है
Aitbar Sajid
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अब तो ख़ुद अपनी ज़रूरत भी नहीं है हम को वो भी दिन थे कि कभी तेरी ज़रूरत हम थे
Aitbar Sajid
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इतना कम-ज़र्फ़ न बन उस के भी सीने में है दिल उस का एहसास भी रख अपनी ही राहत पे न जा
Aitbar Sajid
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डाइरी में सारे अच्छे शे'र चुन कर लिख लिए एक लड़की ने मिरा दीवान ख़ाली कर दिया
Aitbar Sajid
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