अब तू मुझी से दूर है मंज़ूर है ये इश्क़ का दस्तूर है मंज़ूर है
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ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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इश्क़ पर ज़ोर नहीं है ये वो आतिश 'ग़ालिब' कि लगाए न लगे और बुझाए न बने
Mirza Ghalib
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कबूतर इश्क़ का उतरे तो कैसे? तुम्हारी छत पे निगरानी बहुत है इरादा कर लिया गर ख़ुद-कुशी का तो ख़ुद की आँख का पानी बहुत है
Kumar Vishwas
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तू जो हर रोज़ नए हुस्न पे मर जाता है तू बताएगा मुझे इश्क़ है क्या जाने दे
Ali Zaryoun
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तो मैं क्यूँ दूरबीन लेता फिर जो तू आँखों को छीन लेता फिर
Manas Ank
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उसे तारीफ में दो शे'र कहता हूँ वो सुनके फिर मुझे ऐसे कहे कुछ भी
Manas Ank
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निभाना मुश्किलों का है यहाँ पर मुहब्बत एक ज़िम्मेदारी होती
Manas Ank
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मुहब्बत पास भी ले आए गर तो जुदा कर देगी फिर ये जात तुम को
Manas Ank
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जब तक किसी दरख़्त पे पत्ते लगे रहे सब लोग तो फिर उस के ही पीछे लगे रहे देखो मियाँ इधर कि वो लड़की गुलाब है जिस के ही वास्ते ये बग़ीचे लगे रहे
Manas Ank
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