adu ko chhod do phir jaan bhi mango to hazir hai tum aisa kar nahin sakte to aisa ho nahin sakta
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बड़े नादान हो तुम भी ज़रा समझा करो बातें गले मिल कर जो रोती है बिछड़ कर कितना रोएगी
Ankita Singh
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ज़रा ठहरो कि शब फीकी बहुत है तुम्हें घर जाने की जल्दी बहुत है ज़रा नज़दीक आ कर बैठ जाओ तुम्हारे शहर में सर्दी बहुत है
Zubair Ali Tabish
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हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं मोहब्बत की इसी मिट्टी को हिंदुस्तान कहते हैं
Rahat Indori
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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बोसे अपने आरिज़-ए-गुलफ़ाम के ला मुझे दे दे तिरे किस काम के
Muztar Khairabadi
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वो गले से लिपट के सोते हैं आज-कल गर्मियाँ हैं जाड़ों में
Muztar Khairabadi
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वो करेंगे वस्ल का वा'दा वफ़ा रंग गहरे हैं हमारी शाम के
Muztar Khairabadi
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वफ़ा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते कहा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते
Muztar Khairabadi
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लड़ाई है तो अच्छा रात-भर यूँँ ही बसर कर लो हम अपना मुँह इधर कर लें तुम अपना मुँह उधर कर लो
Muztar Khairabadi
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