लड़ाई है तो अच्छा रात-भर यूँँ ही बसर कर लो हम अपना मुँह इधर कर लें तुम अपना मुँह उधर कर लो
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बिछड़ कर उस का दिल लग भी गया तो क्या लगेगा वो थक जाएगा और मेरे गले से आ लगेगा मैं मुश्किल में तुम्हारे काम आऊँ या ना आऊँ मुझे आवाज़ दे लेना तुम्हें अच्छा लगेगा
Tehzeeb Hafi
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दुख अपना अगर हम को बताना नहीं आता तुम को भी तो अंदाज़ा लगाना नहीं आता
Waseem Barelvi
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भीगीं पलकें देख कर तू क्यूँँ रुका है ख़ुश हूँ मैं वो तो मेरी आँख में कुछ आ गया है ख़ुश हूँ मैं वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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मुझ से मत पूछो के उस शख़्स में क्या अच्छा है अच्छे अच्छों से मुझे मेरा बुरा अच्छा है किस तरह मुझ से मुहब्बत में कोई जीत गया ये न कह देना के बिस्तर में बड़ा अच्छा है
Tehzeeb Hafi
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बोसे अपने आरिज़-ए-गुलफ़ाम के ला मुझे दे दे तिरे किस काम के
Muztar Khairabadi
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वो करेंगे वस्ल का वा'दा वफ़ा रंग गहरे हैं हमारी शाम के
Muztar Khairabadi
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वो गले से लिपट के सोते हैं आज-कल गर्मियाँ हैं जाड़ों में
Muztar Khairabadi
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वफ़ा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते कहा क्या कर नहीं सकते हैं वो लेकिन नहीं करते
Muztar Khairabadi
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