अगर हो कोहर-ए-वासर मुजस्सम कौन दिखता है हों जब गर्दिश में गर तारे तो हमदम कौन दिखता है
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उस के होंटों पे रख के होंट अपने बात ही हम तमाम कर रहे हैं
Jaun Elia
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यारो कुछ तो ज़िक्र करो तुम उस की क़यामत बाँहों का वो जो सिमटते होंगे उन में वो तो मर जाते होंगे
Jaun Elia
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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किसी के ज़ख़्म पर चाहत से पट्टी कौन बाँधेगा अगर बहनें नहीं होंगी तो राखी कौन बाँधेगा
Munawwar Rana
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पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
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तमाम उम्र हमें साथ साथ चलना है बस इतना कह के सफ़र कर लिया जुदा उस ने
Ajeetendra Aazi Tamaam
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तुम्हारे शहर में आ कर ठिकाना ढूँढ़ते हैं हम अपने शहर में होते तो घर गए होते
Ajeetendra Aazi Tamaam
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ये मासूम चेहरा ये क़ातिल निगाहें बहुत ख़ूब-सूरत हैं सारी अदाएँ
Ajeetendra Aazi Tamaam
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किसी को रौशनी देने की ख़ातिर चराग़ इक उम्र भर जलता रहा है
Ajeetendra Aazi Tamaam
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एहसास नहीं होता लुटने का सनम हम को जब आप की महफ़िल से हम लौट के आते हैं
Ajeetendra Aazi Tamaam
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