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अक्सर ही ज़ख़्म इश्क़ में पाले हैं औरतें पर कितने टूटे मर्द सँभाले हैं औरतें

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उदास लोग इसी बात से हैं ख़ुश कि चलो हमारे साथ हुए हादसों की बात हुई

Abhishar Geeta Shukla

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तुम को हम ही झूठ लगेंगे लेकिन दरिया झूठा है पहले हम को चाँद मिला था फिर दरिया को चाँद मिला

Abhishar Geeta Shukla

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सोचता हूँ वक़्त की तस्वीर जब मुझ सेे बनेगी तो भला उस की कलाई पर घड़ी कैसी लगेगी चाय उस से पूछ तो सकता हूँ मैं भी दोस्त,लेकिन सोचता हूँ कौन सा वो कहने भर से चल पड़ेगी

Abhishar Geeta Shukla

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तो डर रहे हैं आप कहीं हक़ न माँग ले या'नी कि सब को खौफ़ है औरत के नाम से

Abhishar Geeta Shukla

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दुख तो बहुत मिले हैं मोहब्बत नहीं मिली या'नी कि जिस्म मिल गया औरत नहीं मिली मुझ को पिता की आँख के आँसू तो मिल गए मुझ को पिता से ज़ब्त की आदत नहीं मिली

Abhishar Geeta Shukla

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