तो डर रहे हैं आप कहीं हक़ न माँग ले या'नी कि सब को खौफ़ है औरत के नाम से
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वक़्त रहता नहीं कहीं टिक कर आदत इस की भी आदमी सी है
Gulzar
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कोरे काग़ज़ पर रो रहे हो तुम मैं तो समझा पढ़े लिखे हो तुम क्या कहा मुझ सेे दूर जाना है इस का मतलब है जा चुके हो तुम
Zubair Ali Tabish
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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तुम ने छोड़ा तो किसी और से टकराऊँगा मैं कैसे मुमकिन है कि अंधे का कहीं सर न लगे
Umair Najmi
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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तुम को हम ही झूठ लगेंगे लेकिन दरिया झूठा है पहले हम को चाँद मिला था फिर दरिया को चाँद मिला
Abhishar Geeta Shukla
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सोचता हूँ वक़्त की तस्वीर जब मुझ सेे बनेगी तो भला उस की कलाई पर घड़ी कैसी लगेगी चाय उस से पूछ तो सकता हूँ मैं भी दोस्त,लेकिन सोचता हूँ कौन सा वो कहने भर से चल पड़ेगी
Abhishar Geeta Shukla
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उदास लोग इसी बात से हैं ख़ुश कि चलो हमारे साथ हुए हादसों की बात हुई
Abhishar Geeta Shukla
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दुख तो बहुत मिले हैं मोहब्बत नहीं मिली या'नी कि जिस्म मिल गया औरत नहीं मिली मुझ को पिता की आँख के आँसू तो मिल गए मुझ को पिता से ज़ब्त की आदत नहीं मिली
Abhishar Geeta Shukla
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अक्सर ही ज़ख़्म इश्क़ में पाले हैं औरतें पर कितने टूटे मर्द सँभाले हैं औरतें
Abhishar Geeta Shukla
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