allah ko pa-mardi-e-momin pe bharosa iblis ko europe ki mashinon ka sahaara
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झूट पर उस के भरोसा कर लिया धूप इतनी थी कि साया कर लिया
Shariq Kaifi
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जहाँ तक मुझ सेे मतलब है जहाँ को वही तक मुझ को पूछा जा रहा है ज़माने पर भरोसा करने वालों भरोसे का ज़माना जा रहा है
Naeem Akhtar Khadimi
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है दुख तो कह दो किसी पेड़ से परिंदे से अब आदमी का भरोसा नहीं है प्यारे कोई
Madan Mohan Danish
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दिल को तेरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
Ahmad Faraz
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भरोसा मुझ पे रक्खो और कुछ पल रुका हूँ, मैं अभी हारा नहीं हूँ
Divy Kamaldhwaj
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नहीं इस खुली फ़ज़ा में कोई गोशा-ए-फ़राग़त ये जहाँ अजब जहाँ है न क़फ़स न आशियाना
Allama Iqbal
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वतन की फ़िक्र कर नादाँ मुसीबत आने वाली है तेरी बर्बादियों के मशवरे हैं आसमानों में
Allama Iqbal
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ग़ुलामी में न काम आती हैं शमशीरें न तदबीरें जो हो ज़ौक़-ए-यक़ीं पैदा तो कट जाती हैं ज़ंजीरें
Allama Iqbal
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ढूँढ़ता फिरता हूँ मैं 'इक़बाल' अपने आप को आप ही गोया मुसाफ़िर आप ही मंज़िल हूँ मैं
Allama Iqbal
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जीना वो क्या जो हो नफ़स-ए-ग़ैर पर मदार शोहरत की ज़िंदगी का भरोसा भी छोड़ दे
Allama Iqbal
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