अना से रब्त बढ़ता जा रहा है मैं अब शोहरत की जानिब आ रहा हूँ
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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बिछड़ गए तो ये दिल उम्र भर लगेगा नहीं लगेगा लगने लगा है मगर लगेगा नहीं नहीं लगेगा उसे देख कर मगर ख़ुश है मैं ख़ुश नहीं हूँ मगर देख कर लगेगा नहीं
Umair Najmi
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वही हालात हैं अब के बरस भी मगर कहने को अच्छा दिख रहा हूँ
Aktar ali
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ये ज़मीं आसमान है कब तक तेरा नाम-ओ-निशान है कब तक उस की जानिब से है तमाशा सब वर्ना ये इम्तिहान है कब तक
Aktar ali
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ख़ुदा का शुक्र है जो मिल रहा है उसी में हम गुज़ारा कर रहे हैं
Aktar ali
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मैं ने अक्सर उदास लोगों में एक मासूम आदमी देखा
Aktar ali
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जिस्म से बू जो मेरे आती है तू कमाई उसी की खाती है
Aktar ali
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