मैं ने अक्सर उदास लोगों में एक मासूम आदमी देखा
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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माना कि तेरी दीद के क़ाबिल नहीं हूँ मैं तू मेरा शौक़ देख मिरा इंतिज़ार देख
Allama Iqbal
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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ये न पूछो कि बस दिसंबर में हूँ अकेला हर एक मंज़र में
Aktar ali
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ये ज़मीं आसमान है कब तक तेरा नाम-ओ-निशान है कब तक उस की जानिब से है तमाशा सब वर्ना ये इम्तिहान है कब तक
Aktar ali
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मान लेती जो वो कहा मेरी देखते लोग तब वफ़ा मेरी
Aktar ali
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पहले सूरत के साथ सीरत भी अपने लोगों में पाई जाती थी
Aktar ali
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इतना ख़ुद को सादा रक्खें भाषा की मर्यादा रक्खें
Aktar ali
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