मान लेती जो वो कहा मेरी देखते लोग तब वफ़ा मेरी
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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हम वो हैं जो ख़ुदा को भूल गए तुम मेरी जान किस गुमान में हो
Jaun Elia
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कितने ऐश से रहते होंगे कितने इतराते होंगे जाने कैसे लोग वो होंगे जो उस को भाते होंगे
Jaun Elia
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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा
Faiz Ahmad Faiz
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ये ज़मीं आसमान है कब तक तेरा नाम-ओ-निशान है कब तक उस की जानिब से है तमाशा सब वर्ना ये इम्तिहान है कब तक
Aktar ali
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ये न पूछो कि बस दिसंबर में हूँ अकेला हर एक मंज़र में
Aktar ali
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वही हालात हैं अब के बरस भी मगर कहने को अच्छा दिख रहा हूँ
Aktar ali
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पहले सूरत के साथ सीरत भी अपने लोगों में पाई जाती थी
Aktar ali
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तुम्हें तो पेट भरने से है मतलब हमें तो काम करना पड़ रहा है
Aktar ali
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