पहले सूरत के साथ सीरत भी अपने लोगों में पाई जाती थी
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किस लिए देखती हो आईना तुम तो ख़ुद से भी ख़ूब-सूरत हो
Jaun Elia
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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अपने दिल में बसाओगे हम को और गले से लगाओगे हम को हम नहीं इतने प्यार के क़ाबिल तुम तो पागल बनाओगे हम को
Abrar Kashif
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वो किसी के साथ ख़ुश था कितने दुख की बात थी अब मेरे पहलू में आ कर रो रहा है ख़ुश हूँ मैं
Zubair Ali Tabish
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तुम बहुत ख़ुश रहोगी मेरे साथ वैसे हर इक की अपनी मर्ज़ी है
Tehzeeb Hafi
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ये न पूछो कि बस दिसंबर में हूँ अकेला हर एक मंज़र में
Aktar ali
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ये ज़मीं आसमान है कब तक तेरा नाम-ओ-निशान है कब तक उस की जानिब से है तमाशा सब वर्ना ये इम्तिहान है कब तक
Aktar ali
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मैं ने अक्सर उदास लोगों में एक मासूम आदमी देखा
Aktar ali
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मान लेती जो वो कहा मेरी देखते लोग तब वफ़ा मेरी
Aktar ali
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जिस्म से बू जो मेरे आती है तू कमाई उसी की खाती है
Aktar ali
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