अंदर थी मेरे आग ही बस आग पहले कभी जिस को बुझाने में, मैं सिगरेट का धुआँ बन गया
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हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
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इतना संगीन पाप कौन करे मेरे दुख पर विलाप कौन करे चेतना मर चुकी है लोगों की पाप पर पश्चाताप कौन करे
Azhar Iqbal
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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मेरे आँसू नहीं थम रहे कि वो मुझ सेे जुदा हो गया और तुम कह रहे हो कि छोड़ो अब ऐसा भी क्या हो गया मय-कदों में मेरी लाइनें पढ़ते फिरते हैं लोग मैं ने जो कुछ भी पी कर कहा फ़लसफ़ा हो गया
Tehzeeb Hafi
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ज़िंदगी के प्यारे और उस की ख़ुशी के सात दिन कुछ अलग ही लगते हैं ना ? फरवरी के सात दिन
BR SUDHAKAR
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ये रोब तू अब दोस्तों पे क्यूँ दिखाता है वो तुझ पे जब चिल्ला रही थी तब कहाँ था ये
BR SUDHAKAR
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उस के बिन मर जाएँगे हम ने कहा था अब हो कोशिश क्यूँ? कि जब जीना ग़लत है
BR SUDHAKAR
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जंगली फूल सा है लहजा इक लड़की का जो हर बात पे ही तू तड़ाक करती है
BR SUDHAKAR
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सभी से पूछती है देख कर मुझ को मेरा दिल खो गया है, है किसी के पास
BR SUDHAKAR
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