ज़िंदगी के प्यारे और उस की ख़ुशी के सात दिन कुछ अलग ही लगते हैं ना ? फरवरी के सात दिन
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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तुम मोहब्बत को खेल कहते हो हम ने बर्बाद ज़िंदगी कर ली
Bashir Badr
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मैं भी इक शख़्स पे इक शर्त लगा बैठा था तुम भी इक रोज़ इसी खेल में हारोगे मुझे ईद के दिन की तरह तुम ने मुझे ज़ाया' किया मैं समझता था मुहब्बत से गुज़ारोगे मुझे
Ali Zaryoun
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सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
Khwaja Meer Dard
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मेहरबाँ हम पे हर इक रात हुआ करती थी आँख लगते ही मुलाक़ात हुआ करती थी हिज्र की रात है और आँख में आँसू भी नहीं ऐसे मौसम में तो बरसात हुआ करती थी
Ismail Raaz
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उस के बिन मर जाएँगे हम ने कहा था अब हो कोशिश क्यूँ? कि जब जीना ग़लत है
BR SUDHAKAR
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ये रोब तू अब दोस्तों पे क्यूँ दिखाता है वो तुझ पे जब चिल्ला रही थी तब कहाँ था ये
BR SUDHAKAR
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सभी से पूछती है देख कर मुझ को मेरा दिल खो गया है, है किसी के पास
BR SUDHAKAR
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सब सेे अमीर हो तुम दुनिया में अब से लड़की हाँ तुम ने एक शाइ'र का दिल चुरा लिया है
BR SUDHAKAR
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तोहफ़े इतने आए कि दिल भी ख़ाली नहीं अब तो और मेरी अलमारी तक की साँसें फूल गई
BR SUDHAKAR
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