apni jannat mujhe dikhla na saka tu waiz kucha-e-yar mein chal dekh le jannat meri
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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कैसे आकाश में सूराख़ नहीं हो सकता एक पत्थर तो तबीअ'त से उछालो यारो
Dushyant Kumar
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मैं अगर अपनी जवानी के सुना दूँ क़िस्से ये जो लौंडे हैं मेरे पाँव दबाने लग जाए
Mehshar Afridi
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल हार जाने का हौसला है मुझे
Ahmad Faraz
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उम्मीद के वादों से जी कुछ तो बहलता था अब ये भी तेरे ग़म को मंज़ूर नहीं होते
Fani Badayuni
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ना-उमीदी मौत से कहती है अपना काम कर आस कहती है ठहर ख़त का जवाब आने को है
Fani Badayuni
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अब न काँटों ही से कुछ लाग न फूलों से लगाओ हम ने देखा है तमाशा तेरी रा'नाई का
Fani Badayuni
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इक मुअम्मा है समझने का न समझाने का ज़िन्दगी काहे को है ख़्वाब है दीवाने का
Fani Badayuni
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हर मुसीबत का दिया एक तबस्सुम से जवाब इस तरह गर्दिश-ए-दौराँ को रुलाया मैं ने
Fani Badayuni
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