और कितनी अब वफ़ादारी दिखाएँ तुझ को जानाँ हमनें तेरी बेवफ़ाई भी छिपाई है जहाँ से
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मैं क्या कहूँ के मुझे सब्र क्यूँँ नहीं आता मैं क्या करूँँ के तुझे देखने की आदत है
Ahmad Faraz
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तेरा बनता था कि तू दुश्मन हो अपने हाथों से खिलाया था तुझे तेरी गाली से मुझे याद आया कितने तानों से बचाया था तुझे
Ali Zaryoun
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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नाम पे हम क़ुर्बान थे उस के लेकिन फिर ये तौर हुआ उस को देख के रुक जाना भी सब से बड़ी क़ुर्बानी थी मुझ से बिछड़ कर भी वो लड़की कितनी ख़ुश ख़ुश रहती है उस लड़की ने मुझ से बिछड़ कर मर जाने की ठानी थी
Jaun Elia
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इसीलिए तो मैं रोया नहीं बिछड़ते समय तुझे रवाना किया है जुदा नहीं किया है
Ali Zaryoun
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हम ने सँभाल रक्खे हैं अपनी तिज़ोरी में उस के दिए वो तोहफ़े नहीं हैं ख़ज़ाने हैं
Harsh saxena
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दर-ब-दर ढूँढ़ रहे हैं जिसे अरसे से हम शख़्स वो मेरी ही आँखों में छिपा बैठा है
Harsh saxena
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किसी को उस नज़र से इस लिए देखा नहीं हम ने ज़माने भर में तुझ जैसी भला लज़्ज़त कहाँ होगी
Harsh saxena
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काँधे पे उस के सर रखा तो यूँँ लगा मुझे जैसे मना लिए सभी त्यौहार होली में
Harsh saxena
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इस ज़िंदगानी की ग़ज़ल का क़ाफ़िया सा लगता है उस के बिना तो जैसे पूरा घर बुझा सा लगता है यूँँ तो कोई मंदिर नहीं दुनिया में उस के नाम का लेकिन न जाने क्यूँ मुझे वो देवता सा लगता है
Harsh saxena
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