दर-ब-दर ढूँढ़ रहे हैं जिसे अरसे से हम शख़्स वो मेरी ही आँखों में छिपा बैठा है
Related Sher
पूछते हैं वो कि ग़ालिब कौन है कोई बतलाओ कि हम बतलाएँ क्या
Mirza Ghalib
208 likes
तेरे लगाए हुए ज़ख़्म क्यूँँ नहीं भरते मेरे लगाए हुए पेड़ सूख जाते हैं
Tehzeeb Hafi
200 likes
कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
521 likes
ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
484 likes
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
More from Harsh saxena
बर्बादी की पहुँच गया हूँ उस कगार पर दीवाना हो चुका हूँ मैं अल्ताफ़ का जहाँ
Harsh saxena
3 likes
हासिल न कर पाया तुझे मैं मिन्नतों के बा'द भी उम्मीद सेंटा से लगाना लाज़मी भी है मिरा
Harsh saxena
1 likes
हमें इस मिट्टी से कुछ यूँँ मुहब्बत है यहीं पे निकले दम दिल की ये हसरत है हमें क्यूँ चाह उस दुनिया की हो मौला हमारी तो इसी मिट्टी में जन्नत है
Harsh saxena
4 likes
'हर्ष' वस्ल में जितनी मर्ज़ी शे'र कह लो तुम हिज्र के बिना इन में जान आ नहीं सकती
Harsh saxena
2 likes
वो शख़्स काश अपना शौहर बनाता मुझ को जिस शख़्स के ग़मों ने शाइ'र बना रखा है
Harsh saxena
7 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Harsh saxena.
Similar Moods
More moods that pair well with Harsh saxena's sher.







