ba-qadr-e-paimana-e-takhayyul surur har dil mein hai khudi ka agar na ho ye fareb-e-paiham to dam nikal jae aadmi ka
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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घर में भी दिल नहीं लग रहा काम पर भी नहीं जा रहा जाने क्या ख़ौफ़ है जो तुझे चूम कर भी नहीं जा रहा रात के तीन बजने को है यार ये कैसा महबूब है जो गले भी नहीं लग रहा और घर भी नहीं जा रहा
Tehzeeb Hafi
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इन्ही हैरत-ज़दा आँखों से देखे हैं वो आँसू भी जो अक्सर धूप में मेहनत की पेशानी से ढलते हैं
Jameel Mazhari
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जलाने वाले जलाते ही हैं चराग़ आख़िर ये क्या कहा कि हवा तेज़ है ज़माने की
Jameel Mazhari
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होने दो चराग़ाँ महलों में क्या हम को अगर दीवाली है मज़दूर हैं हम मज़दूर हैं हम मज़दूर की दुनिया काली है
Jameel Mazhari
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