बादबाँ नाज़ से लहरा के चली बाद-ए-मुराद कारवाँ ईद मना क़ाफ़िला-सालार आया
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नाज़ुकी उस के लब की क्या कहिए पंखुड़ी इक गुलाब की सी है
Meer Taqi Meer
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जनाज़े पर मेरे लिख देना यारों मोहब्बत करने वाला जा रहा है
Rahat Indori
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मोहब्बत एक पाकीज़ा अमल है इस लिए शायद सिमट कर शर्म सारी एक बोसे में चली आई
Munawwar Rana
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छू लेने दो नाज़ुक होंठों को, कुछ और नहीं हैं जाम हैं ये क़ुदरत ने जो हम को बख़्शा है, वो सब सेे हसीं ईनाम हैं ये
Sahir Ludhianvi
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ले साँस भी आहिस्ता कि नाज़ुक है बहुत काम आफ़ाक़ की इस कारगह-ए-शीशागरी का
Meer Taqi Meer
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मर के पाया शहीद का रुत्बा मेरी इस ज़िन्दगी की उम्र दराज़
Josh Malihabadi
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सुबूत है ये मोहब्बत की सादा-लौही का जब उस ने वा'दा किया हम ने ए'तिबार किया
Josh Malihabadi
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उस ने वा'दा किया है आने का रंग देखो ग़रीब ख़ाने का
Josh Malihabadi
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दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया जब चली सर्द हवा मैं ने तुझे याद किया
Josh Malihabadi
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सुबूत है ये मोहब्बत की सादा-लौही का जब उस ने वा'दा किया हम ने ए'तिबार
Josh Malihabadi
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