बाज़ार में नसीब का सिक्का जो चल पड़ा आक़िल मिलेगा पैर पे बैठा गँवार के ग़म छोड़ते नहीं हैं मिरा साथ और मैं बैठा हूँ इंतिज़ार में कब से बहार के
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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मुझे बस इक दफ़ा अपना कहो तुम मैं जीवन भर तुम्हें अपना कहूँगा
SAAGAR SINGH RAJPUT
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मुझे भगवन मिरे कुछ तो बनाएँगे मिरे भगवन ने मेरी पीर देखी है
SAAGAR SINGH RAJPUT
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मुझ से भी अच्छी मिल जाएगी तुम को रोई है वो लड़की ये कह कर मुझ से
SAAGAR SINGH RAJPUT
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मुझे ज़िन्दगी से नहीं है गिला कुछ मगर ज़िन्दगी ने सताया बहुत है
SAAGAR SINGH RAJPUT
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यार फिर से ख़सारा होने वाला है इश्क़ मुझ को दुबारा होने वाला है
SAAGAR SINGH RAJPUT
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