बर्बाद किया मुझ को ज़रा वक़्त ने तो फिर पहचाने से ये लोग अब अंजान लगे हैं
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
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मुद्दतें गुज़र गई 'हिसाब' नहीं किया न जाने अब किस के कितने रह गए हम
Kumar Vishwas
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कोई शहर था जिस की एक गली मेरी हर आहट पहचानती थी मेरे नाम का इक दरवाज़ा था इक खिड़की मुझ को जानती थी
Ali Zaryoun
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कोई इतना प्यारा कैसे हो सकता है फिर सारे का सारा कैसे हो सकता है तुझ सेे जब मिल कर भी उदासी कम नहीं होती तेरे बग़ैर गुज़ारा कैसे हो सकता है
Jawwad Sheikh
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रक्खे थे हिफाज़त से जो ख़त मैं ने वो सब आज वापस मैं यहाँ आया हूँ दरिया में बहा के
Manish Yadav
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चमक फीकी थी लेकिन तेरे आने से हुआ रौशन है देखो मेरा घर तुझ सेे
Manish Yadav
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तिरे होंठों की खिलती हर हँसी तक कर गुल अब सीखेंगे खिलने का हुनर तुझ सेे
Manish Yadav
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उदासी का सबब था और कुछ यारो सबब सब तेरा जाना ही समझ बैठे
Manish Yadav
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तुम्हें वा'दा निभाना था अजल तक साथ जाना था किनारे आज बैठे हैं हमें तो डूब जाना था तुम्हें समझाऊॅं कितना मैं कहा कुछ भी न माना था ये तुम ने क्यूँ बचाया है उसे मुझ को डुबाना था
Manish Yadav
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