bhula din hum ne kitaben ki us pari-ru ke kitabi chehre ke aage kitab hai kya chiz
Related Sher
ये दुख अलग है कि उस सेे मैं दूर हो रहा हूँ ये ग़म जुदा है वो ख़ुद मुझे दूर कर रहा है तेरे बिछड़ने पर लिख रहा हूँ मैं ताज़ा ग़ज़लें ये तेरा ग़म है जो मुझ को मशहूर कर रहा है
Tehzeeb Hafi
394 likes
हम भी दरिया हैं हमें अपना हुनर मालूम है जिस तरफ़ भी चल पड़ेंगे रास्ता हो जाएगा
Bashir Badr
373 likes
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
354 likes
तुम्हें हम भी सताने पर उतर आएँ तो क्या होगा तुम्हारा दिल दुखाने पर उतर आएँ तो क्या होगा हमें बदनाम करते फिर रहे हो अपनी महफ़िल में अगर हम सच बताने पर उतर आएँ तो क्या होगा
Santosh S Singh
339 likes
देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
300 likes
More from Nazeer Akbarabadi
दोस्तो क्या क्या दिवाली में नशात-ओ-ऐश है सब मुहय्या है जो इस हंगाम के शायाँ है शय
Nazeer Akbarabadi
21 likes
है दसहरे में भी यूँँ गर फ़रहत-ओ-ज़ीनत 'नज़ीर' पर दिवाली भी अजब पाकीज़ा-तर त्यौहार है
Nazeer Akbarabadi
20 likes
दिन जल्दी जल्दी चलता हो तब देख बहारें जाड़े की और पाला बर्फ़ पिघलता हो तब देख बहारें जाड़े की
Nazeer Akbarabadi
23 likes
बाज़ार गली और कूचों में ग़ुल-शोर मचाया होली ने दिल शाद किया और मोह लिया ये जौबन पाया होली ने
Nazeer Akbarabadi
23 likes
मुँह ज़र्द-ओ-आह-ए-सर्द ओ लब-ए-ख़ुश्क ओ चश्म-ए-तर सच्ची जो दिल-लगी है तो क्या क्या गवाह है
Nazeer Akbarabadi
22 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Nazeer Akbarabadi.
Similar Moods
More moods that pair well with Nazeer Akbarabadi's sher.







