चार दिन लिक्खे थे ज़िंदगानी में बस एक लम्हे में और ज़िन्दगी बढ़ गई कुछ ख़बर है तुम्हें देखने से फ़क़त कितनों की आँख की रौशनी बढ़ गई
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बंसी सब सुर त्यागे है, एक ही सुर में बाजे है हाल न पूछो मोहन का, सब कुछ राधे राधे है
Zubair Ali Tabish
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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अगर तुम हो तो घबराने की कोई बात थोड़ी है ज़रा सी बूँदा-बाँदी है बहुत बरसात थोड़ी है ये राह-ए-इश्क़ है इस में क़दम ऐसे ही उठते हैं मोहब्बत सोचने वालों के बस की बात थोड़ी है
Abrar Kashif
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हज़ारों साल नर्गिस अपनी बे-नूरी पे रोती है बड़ी मुश्किल से होता है चमन में दीदा-वर पैदा
Allama Iqbal
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तुम्हें हुस्न पर दस्तरस है मोहब्बत वोहब्बत बड़ा जानते हो तो फिर ये बताओ कि तुम उस की आँखों के बारे में क्या जानते हो ये जुग़राफ़िया फ़ल्सफ़ा साईकॉलोजी साइंस रियाज़ी वग़ैरा ये सब जानना भी अहम है मगर उस के घर का पता जानते हो
Tehzeeb Hafi
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उठाए नाज़ तेरे ऐसा दिवाना मिले हम से कोई बेहतर तो बताना
Deepak Pathak
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ख़ूब-सूरत ज़िन्दगी कभी नहीं देखी पहले ऐसी सादगी कभी नहीं देखी चाँद ने कल देख के तुझे कहा बस ये मैं ने इतनी रौशनी कभी नहीं देखी
Deepak Pathak
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बस इक दिन के लिए कब ख़ास रहती है उदासी हम को बारह मास रहती है
Deepak Pathak
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पुराने गीत चलाओ तो कुछ बात बने हमारे साथ में गाओ तो कुछ बात बने हमेशा नाज़ उठाते हैं हम आप के ही कभी हम को भी मनाओ तो कुछ बात बने
Deepak Pathak
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मान लो, ये बस ज़रा सी बात है दिन तुम्हारा है हमारी रात है
Deepak Pathak
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