बस इक दिन के लिए कब ख़ास रहती है उदासी हम को बारह मास रहती है
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ये मत भूलो कि ये लम्हात हम को बिछड़ने के लिए मिलवा रहे हैं
Jaun Elia
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सुना है लोग उसे आँख भर के देखते हैं सो उस के शहर में कुछ दिन ठहर के देखते हैं
Ahmad Faraz
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मुझे पहले पहल लगता था ज़ाती मसअला है मैं फिर समझा मोहब्बत क़ायनाती मसअला है परिंदे क़ैद हैं तुम चहचहाहट चाहते हो तुम्हें तो अच्छा ख़ासा नफ़सियाती मसअला है
Umair Najmi
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दिन में मिल लेते कहीं रात ज़रूरी थी क्या? बेनतीजा ये मुलाक़ात ज़रूरी थी क्या मुझ सेे कहते तो मैं आँखों में बुला लेता तुम्हें भीगने के लिए बरसात ज़रूरी थी क्या
Abrar Kashif
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जहाँ से जी न लगे तुम वहीं बिछड़ जाना मगर ख़ुदा के लिए बे-वफ़ाई न करना
Munawwar Rana
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चार दिन लिक्खे थे ज़िंदगानी में बस एक लम्हे में और ज़िन्दगी बढ़ गई कुछ ख़बर है तुम्हें देखने से फ़क़त कितनों की आँख की रौशनी बढ़ गई
Deepak Pathak
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मान लो, ये बस ज़रा सी बात है दिन तुम्हारा है हमारी रात है
Deepak Pathak
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उठाए नाज़ तेरे ऐसा दिवाना मिले हम से कोई बेहतर तो बताना
Deepak Pathak
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जवाब भी नहीं देते सवाल भी नहीं पूछते कमाल के हैं मेरे यार हाल भी नहीं पूछते
Deepak Pathak
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ख़ूब-सूरत ज़िन्दगी कभी नहीं देखी पहले ऐसी सादगी कभी नहीं देखी चाँद ने कल देख के तुझे कहा बस ये मैं ने इतनी रौशनी कभी नहीं देखी
Deepak Pathak
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