चाहा था ठोकरों में गुज़र जाए ज़िंदगी लोगों ने संग-ए-राह समझ कर हटा दिया
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हमारे बा'द तेरे इश्क़ में नए लड़के बदन तो चू मेंगे ज़ुल्फ़ें नहीं सँवारेंगे
Vikram Gaur Vairagi
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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बहार-ए-गुलिस्ताँ हम को न पहचाने तअज्जुब है गुलों के रुख़ पे छिड़का है बहुत ख़ून-ए-जिगर हम ने
Salik Lakhnavi
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यूँँही इंसानों के शहरों में मिला अपना वजूद किसी वीराने में इक फूल खिला हो जैसे
Salik Lakhnavi
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साहिल पे क़ैद लाखों सफ़ीनों के वास्ते मेरी शिकस्ता नाव है तूफ़ाँ लिए हुए
Salik Lakhnavi
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