चले चलिए कि चलना ही दलील-ए-कामरानी है जो थक कर बैठ जाते हैं वो मंज़िल पा नहीं सकते
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हम आह भी करते हैं तो हो जाते हैं बदनाम वो क़त्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होता
Akbar Allahabadi
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बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
Kumar Vishwas
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अच्छे शे'र सुनाने वाले लड़के सुन अच्छे शाइ'र तन्हा ही रह जाते हैं
Ritesh Rajwada
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तोहफ़ा, फूल, शिकायत, कुछ तो ले कर जा इश्क़ से मिलने ख़ाली हाथ नहीं जाते
Tanoj Dadhich
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मौत ने सारी रात हमारी नब्ज़ टटोली ऐसा मरने का माहौल बनाया हम ने घर से निकले चौक गए फिर पार्क में बैठे तन्हाई को जगह-जगह बिखराया हम ने
Shariq Kaifi
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हर हक़ीक़त है एक हुस्न 'हफ़ीज़' और हर हुस्न इक हक़ीक़त है
Hafeez Banarasi
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कुछ इस के सँवर जाने की तदबीर नहीं है दुनिया है तिरी ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर नहीं है
Hafeez Banarasi
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उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया
Hafeez Banarasi
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चले चलिए कि चलना ही दलील-ए-कामरानी है जो थक कर बैठ जाते हैं वो मंज़िल पा नहीं सकते
Hafeez Banarasi
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समझ के आग लगाना हमारे घर में तुम हमारे घर के बराबर तुम्हारा भी घर है
Hafeez Banarasi
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