बात करो रूठे यारों से सन्नाटों से डर जाते हैं प्यार अकेला जी लेता है दोस्त अकेले मर जाते हैं
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हुई मुद्दत कि 'ग़ालिब' मर गया पर याद आता है वो हर इक बात पर कहना कि यूँँ होता तो क्या होता
Mirza Ghalib
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चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
Vikram Gaur Vairagi
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तुम्हें इक मश्वरा दूँ सादगी से कह दो दिल की बात बहुत तैयारियाँ करने में गाड़ी छूट जाती है
Zubair Ali Tabish
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बात ही कब किसी की मानी है अपनी हठ पूरी कर के छोड़ोगी ये कलाई ये जिस्म और ये कमर तुम सुराही ज़रूर तोड़ोगी
Jaun Elia
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कौन सी बात है तुम में ऐसी इतने अच्छे क्यूँँ लगते हो
Mohsin Naqvi
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मेरा ख़याल तेरी चुप्पियों को आता है तेरा ख़याल मेरी हिचकियों को आता है
Kumar Vishwas
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चारों तरफ़ बिखर गईं साँसों की ख़ुशबुएँ राह-ए-वफ़ा में आप जहाँ भी जिधर गए
Kumar Vishwas
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जिस्म चादर सा बिछ गया होगा रूह सिलवट हटा रही होगी
Kumar Vishwas
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मैं उस सेे दूर था तो शोर था साजिश है, साजिश है उसे बाहों में खुलकर कस लिया दो पल तो हंगामा
Kumar Vishwas
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सखियों संग रँगने की धमकी सुन कर क्या डर जाऊँगा तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा
Kumar Vishwas
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