चेहरा धुँदला सा था और सुनहरे झुमके थे बादल ने कानों में चाँद के टुकड़े पहने थे इक दूजे को खोने से हम इतना डरते थे ग़ुस्सा भी होते तो बातें करते रहते थे
Related Sher
कोई चेहरा किसी को उम्र भर अच्छा नहीं लगता हसीं है चाँद भी, शब भर मगर अच्छा नहीं लगता
Munawwar Rana
49 likes
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
Kumar Vishwas
66 likes
देखने के लिए सारा आलम भी कम चाहने के लिए एक चेहरा बहुत
Asad Badayuni
49 likes
वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में जो दूर है वो दिल से उतर क्यूँँ नहीं जाता
Nida Fazli
54 likes
ज़ब्त करो गर ग़म के बादल छाए हैं, रक़्स करो के बारिश आने वाली है
Darpan
32 likes
More from Vikram Gaur Vairagi
इक अव्वल दर्जे का पाक इक माहिर है मन तो तुझ में रमता है दिल काफ़िर फिर है अपनी सोचो क़त्ल तुम्हें करना भी है बन्दे का तो क्या है बन्दा हाज़िर है
Vikram Gaur Vairagi
33 likes
बग़ैर चश्में के जो देख भी न पाता है वो बेवक़ूफ़ मुझे देखना सिखाता है अगर ये वक़्त डुबोएगा मेरी नाव को तो इस सेे कह दो मुझे तैरना भी आता है
Vikram Gaur Vairagi
42 likes
टूटी चीज़ों को बदल दें था बेहतर वरना तू जो चाहता तो दोबारा बना लेता हमें इस तरह रोते हैं याद करते हुए हम तुझे जैसे तू होता तो सीने से लगा लेता हमें
Vikram Gaur Vairagi
39 likes
कूज़ा-गर मिल गया तो पूछूँगा मेरी मिट्टी कहाँ से लाया था
Vikram Gaur Vairagi
34 likes
मुझे अँधेरे से बात करनी है सो करा दो, दिया बुझा दो कुछ एक लम्हों को रौशनी का गला दबा दो, दिया बुझा दो रिवाज़-ए-महफ़िल निभा रहा हूँ बता रहा हूँ मैं जा रहा हूँ मुझे विदा दो, जो रोना चाहे उन्हें बुला दो, दिया बुझा दो
Vikram Gaur Vairagi
52 likes
Similar Writers
Our suggestions based on Vikram Gaur Vairagi.
Similar Moods
More moods that pair well with Vikram Gaur Vairagi's sher.







