मुझे अँधेरे से बात करनी है सो करा दो, दिया बुझा दो कुछ एक लम्हों को रौशनी का गला दबा दो, दिया बुझा दो रिवाज़-ए-महफ़िल निभा रहा हूँ बता रहा हूँ मैं जा रहा हूँ मुझे विदा दो, जो रोना चाहे उन्हें बुला दो, दिया बुझा दो
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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वो मेरे चेहरे तक अपनी नफरतें लाया तो था मैं ने उस के हाथ चू में और बेबस कर दिया
Waseem Barelvi
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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ये मुझे चैन क्यूँ नहीं पड़ता एक ही शख़्स था जहान में क्या
Jaun Elia
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बिठा दिया है सिपाही के दिल में डर उस ने तलाशी दी है दुपट्टा उतार कर उस ने मैं इस लिए भी उसे ख़ुद-कुशी से रोकता हूँ लिखा हुआ है मेरा नाम जिस्म पर उस ने
Zia Mazkoor
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यूँँ बे-तरतीब ज़ख़्मों ने बताया राज़ क़ातिल का सलीक़े से जो मेरा क़त्ल गर होता तो क्या होता
Vikram Gaur Vairagi
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इक अव्वल दर्जे का पाक इक माहिर है मन तो तुझ में रमता है दिल काफ़िर फिर है अपनी सोचो क़त्ल तुम्हें करना भी है बन्दे का तो क्या है बन्दा हाज़िर है
Vikram Gaur Vairagi
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बग़ैर चश्में के जो देख भी न पाता है वो बेवक़ूफ़ मुझे देखना सिखाता है अगर ये वक़्त डुबोएगा मेरी नाव को तो इस सेे कह दो मुझे तैरना भी आता है
Vikram Gaur Vairagi
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कुछ रिश्तों में दिल को आज़ादी नइँ होती कुछ कमरों में रौशनदान नहीं होता है
Vikram Gaur Vairagi
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हैरान हो के देख रहे हैं मुझे अज़ाब मैं मर रहा हूँ और बहुत इत्मीनान से
Vikram Gaur Vairagi
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