उस दुश्मन-ए-वफ़ा को दुआ दे रहा हूँ मैं मेरा न हो सका वो किसी का तो हो गया
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जो ख़ानदानी रईस हैं वो मिज़ाज रखते हैं नर्म अपना तुम्हारा लहजा बता रहा है, तुम्हारी दौलत नई नई है
Shabeena Adeeb
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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सोचूँ तो सारी उम्र मोहब्बत में कट गई देखूँ तो एक शख़्स भी मेरा नहीं हुआ
Jaun Elia
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कुछ इस के सँवर जाने की तदबीर नहीं है दुनिया है तिरी ज़ुल्फ़-ए-गिरह-गीर नहीं है
Hafeez Banarasi
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हर हक़ीक़त है एक हुस्न 'हफ़ीज़' और हर हुस्न इक हक़ीक़त है
Hafeez Banarasi
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आसान नहीं मरहला-ए-तर्क-ए-वफ़ा भी मुद्दत हुई हम इस को भुलाने में लगे हैं
Hafeez Banarasi
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चले चलिए कि चलना ही दलील-ए-कामरानी है जो थक कर बैठ जाते हैं वो मंज़िल पा नहीं सकते
Hafeez Banarasi
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चले चलिए कि चलना ही दलील-ए-कामरानी है जो थक कर बैठ जाते हैं वो मंज़िल पा नहीं सकते
Hafeez Banarasi
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