धन्य अपने आप को समझे धरा वो जिस जगह भी पाँव मेरे राम रक्खें
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क्या ख़बर कौन था वो, और मेरा क्या लगता था जिस सेे मिल कर मुझे, हर शख़्स बुरा लगता था
Tehzeeb Hafi
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वो अफ़्साना जिसे अंजाम तक लाना न हो मुमकिन उसे इक ख़ूब-सूरत मोड़ दे कर छोड़ना अच्छा
Sahir Ludhianvi
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ले दे के अपने पास फ़क़त इक नज़र तो है क्यूँँ देखें ज़िंदगी को किसी की नज़र से हम
Sahir Ludhianvi
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मैं क्या बताऊँ वो कितना क़रीब है मेरे मेरा ख़याल भी उस को सुनाई देता है वो जिस ने आँख अता की है देखने के लिए उसी को छोड़ के सब कुछ दिखाई देता है
Zubair Ali Tabish
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मेरे नाम से क्या मतलब है तुम्हें मिट जाएगा या रह जाता है जब तुम ने ही साथ नहीं रहना फिर पीछे क्या रह जाता है मेरे पास आने तक और किसी की याद उसे खा जाती है वो मुझ तक कम ही पहुँचता है किसी और जगह रह जाता है
Tehzeeb Hafi
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इस क़दर हावी है तिरी वहशत चाँद देखूँ तो तू नज़र आए
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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कोई तो चाहता होगा हमें भी किसी के फोन में हम सेव होंगे
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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ज़िंदगी भी ख़त्म होती ही नहीं और ये उदासी जान लेने पर तुली है
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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रंग सारे आ गए आरिज़ पे मेरे जब कहा उस ने मुझे होली मुबारक
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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बस में आ के बैठे हैं इक चाँद के पीछे पीछे
Yashvardhan Mishra 'Hind'
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