dil hijr ke dard se bojhal hai ab aan milo to behtar ho is baat se hum ko kya matlab ye kaise ho ye kyunkar ho
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चाँदी सोना एक तरफ़ तेरा होना एक तरफ़ एक तरफ़ तेरी आँखें जादू टोना एक तरफ़
Gyan Prakash Akul
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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हम को मालूम है जन्नत की हक़ीक़त लेकिन दिल के ख़ुश रखने को 'ग़ालिब' ये ख़याल अच्छा है
Mirza Ghalib
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ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है
Allama Iqbal
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ये अलग बात कि ख़ामोश खड़े रहते हैं फिर भी जो लोग बड़े हैं, वो बड़े रहते हैं
Rahat Indori
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जो मोतियों की तलब ने कभी उदास किया तो हम भी राह से कंकर समेट लाए बहुत
Ibn E Insha
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दिल हिज्र के दर्द से बोझल है अब आन मिलो तो बेहतर हो इस बात से हम को क्या मतलब ये कैसे हो ये क्यूँँकर हो
Ibn E Insha
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बे तेरे क्या वहशत हम को तुझ बिन कैसा सब्र-ओ-सुकूँ तू ही अपना शहर है जानी तू ही अपना सहरा है
Ibn E Insha
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वहशत-ए-दिल के ख़रीदार भी नापैद हुए कौन अब इश्क़ के बाज़ार में खोलेगा दुकाँ
Ibn E Insha
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वो रातें चाँद के साथ गईं वो बातें चाँद के साथ गईं अब सुख के सपने क्या देखें जब दुख का सूरज सर पर हो
Ibn E Insha
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