इक तो फ़ुर्सत ही नहीं दफ़्तर से मुझ को हाए रे! ऊपर से ये कमबख़्त औरत
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आईने आँख में चुभते थे बिस्तर से बदन कतराता था एक याद बसर करती थी मुझे मैं साँस नहीं ले पाता था
Tehzeeb Hafi
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शाख़ों से टूट जाएँ वो पत्ते नहीं हैं हम आँधी से कोई कह दे कि औक़ात में रहे
Rahat Indori
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कोई दिक़्क़त नहीं है गर तुम्हें उलझा सा लगता हूँ मैं पहली मर्तबा मिलने में सब को ऐसा लगता हूँ ज़रूरी तो नहीं हम साथ हैं तो कोई चक्कर हो वो मेरी दोस्त है और मैं उसे बस अच्छा लगता हूँ
Ali Zaryoun
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देखो हम कोई वहशी नहीं दीवाने हैं तुम सेे बटन खुलवाने नहीं लगवाने हैं
Varun Anand
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हुआ ही क्या जो वो हमें मिला नहीं बदन ही सिर्फ़ एक रास्ता नहीं ये पहला इश्क़ है तुम्हारा सोच लो मेरे लिए ये रास्ता नया नहीं
Azhar Iqbal
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रेशमी ज़ुल्फ़ों के तुम अपनी इशारे समझो आज रंगीन करें रात क़रीब आ जाओ
Sohaib Alvi
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बेल उस दर की बजा आया मैं रह गया तकता दरीचा मुझ को
Sohaib Alvi
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परमिशन चाहता हूँ देख ये शीशे से मैं बाँधने लग गया हूँ रस्सी को पंखे से मैं
Sohaib Alvi
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जब बच्चों के हाथों वालिद की शामत आ जाएगी पैगंबर ने फरमाया था कि कयामत आ जाएगी
Sohaib Alvi
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तेरा लेना ना इक ना देना दो भाई तू क्यूँँ अकड़ के बैठ गया
Sohaib Alvi
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