एक तोते की तरह फेर ली नज़रें उस ने वो जो हर बात पे लब्बैक कहा करता था
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उसे किसी से मोहब्बत थी और वो मैं नहीं था ये बात मुझ सेे ज़ियादा उसे रुलाती थी
Ali Zaryoun
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कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी सदियों रहा है दुश्मन दौर-ए-ज़माँ हमारा
Allama Iqbal
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तेरी सूरत से है आलम में बहारों को सबात तेरी आँखों के सिवा दुनिया में रक्खा क्या है
Faiz Ahmad Faiz
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रातें किसी याद में कटती हैं और दिन दफ़्तर खा जाता है दिल जीने पर माएल होता है तो मौत का डर खा जाता है सच पूछो तो 'तहज़ीब हाफ़ी' मैं ऐसे दोस्त से आज़िज़ हूँ मिलता है तो बात नहीं करता और फोन पे सर खा जाता है
Tehzeeb Hafi
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उलझ कर के तेरी ज़ुल्फ़ों में यूँँ आबाद हो जाऊँ कि जैसे लखनऊ का मैं अमीनाबाद हो जाऊँ मैं यमुना की तरह तन्हा निहारूँ ताज को कब तक कोई गंगा मिले तो मैं इलाहाबाद हो जाऊँ
Ashraf Jahangeer
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तुम सेे दिल को यही शिकायत है ये मोहब्बत है या अदावत है
Muneer shehryaar
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उस की तस्वीर से अक्सर मैं कहा करता हूँ बे वफ़ा तू है मगर मैं तो वफ़ा करता हूँ
Muneer shehryaar
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वो जो नज़रों से दूर होते हैं वो ही दिल के सुरूर होते हैं वो ही करते हैं ज़िंदगी काली वो जो आँखों के नूर होते हैं
Muneer shehryaar
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सारी दुनिया को रौशनी दे कर चांँदनी बे लिबास होती है
Muneer shehryaar
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कितनी मासूमियत है उस में ये पास जा कर उसे बताऊँगा
Muneer shehryaar
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